स्मृति ईरानी के बाद मनोज तिवारी और डॉ. हर्षवर्धन के साथ दिखा गौरी लंकेश की हत्या को ‘कुतिया की मौत’ कहने वाला मोदी समर्थक

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वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्‍या के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने बेहद गुस्‍से में प्रतिक्रिया दी, वहीं कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने गौरी लंकेश की हत्या पर खुशी व्यक्त की। इसी बीच सोशल मीडिया पर मोदी समर्थक निखिल दधीच नामक व्यक्ति ने बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए गौरी लंकेश की हत्या को सही ठहराया।जिसे देश के प्रधानमंत्री मोदी तक फॉलो करते है

जिसके बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि, वह ऐसे ट्रोल्‍स को बढ़ावा देते हैं। बता दें कि, निखिल दधीच का ट्वीट वायरल होने के बाद उसने अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया था लेकिन उसके ट्वीट का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रह है। इसके साथ ही निखिल दधीच की बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ भी कुछ तस्वीरे वायरल हो रही है।

इस तस्वीर में आप देख सकते है कि, गौरी लंकेश की हत्या को ‘कुतिया की मौत’ कहने वाल मोदी समर्थक निखिल दधीच एक तस्वीर में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के साथ नज़र आ रहा है। दूसरी तस्वीर में   सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी के साथ नज़र आ रहा है। वहीं तीसरी तस्वीर में वो उत्तर पूर्व दिल्ली से बीजेपी सांसद और दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ नज़र आ रहा है।

बता दें, वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की मंगलवार(5 सितंबर) की रात करीब 8.30 बजे बेंगलुरु में अज्ञात बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद बुधवार(6 सितंबर) को सैकड़ो पत्रकारों और बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों ने दिल्ली के प्रेस कल्ब में एकत्रित होकर इस हत्या की कड़ी निंदा की और लंकेश की हत्या को लोकतंत्र की हत्या करार दिया।

बता दें कि, गौरी लंकेश सांप्रदायिकता और हिंदुत्व की राजनीति के खिलाफ लिखती और बोलती रही हैं। वे कन्नड़ भाषा में अपनी एक साप्ताहिक मैगजीन निकालती थीं, जिसमें वह तीखे तेवर में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधती रहती थीं।

Journalist Gauri Lankesh's murder, all of us are responsible for her death

बता दें कि, राजनेताओं के अलावा, पत्रकारों, समाजसेवियों और फिल्मी दुनिया से जुड़ी हस्तियों तक ने इस हत्या को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किए जाने की मांग की है। वहीं कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का भी गठन किया है।

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