गौरी लंकेश की हत्या से पहले इन पत्रकारों को भी आवाज उठाने की खातिर गंवानी पड़ी थी अपनी जान

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वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की मंगलवार(5 सितंबर) को बेंगलुरु में गोली मारकर हत्या कर दी गई। 55 साल की गौरी दक्षिणपंथी संगठनों के खिलाफ मुखर थीं और कई कट्टर हिंदूवादी संगठनों से उन्हें धमकियां भी मिल रही थीं। गौरी लंकेश की हत्या के बाद फिल्म जगत और राजनीतिक गलियारों में गुस्सा भड़क पड़ा।

गौरी लंकेश

पुलिस उपायुक्त एमएन अनुचेत ने कहा कि राज राजेश्वरी नगर में गौरी को उनके घर में ही गोली मारी गई, अनुचेत ने कहा कि जांच अभी चल रही है और अभी किसी संगठन का नाम लेना जल्दबाजी होगी। पुलिस के मुताबिक, तीन संदिग्ध गौरी के घर में घुसे और उन पर नजदीक से गोलियां चलाईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

बता दें कि, वह सांध्य मैगजीन लंकेश पत्रिके की संपादक थीं, गौरी एक स्वाभिमानी महिला पत्रकार थीं जो अपनी स्पष्टवादिता के लिए जानी जाती थीं। पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की चारों तरफ कड़ी निंदा हो रही है।

राजनेताओं के अलावा, पत्रकारों, समाजसेवियों और फिल्मी दुनिया से जुड़ी हस्तियों तक ने इस हत्या को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किए जाने की मांग की है।

उल्लेखनीय हैं कि हमारे देश के संविधान में पत्रकारिता को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का दर्जा दिया गया है। लेकिन मंगलवार(5 सितंबर) को बेंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या ने इस बात को फिर साबित कर दिया कि इस पेशे से जुड़े लोगों का जीवन खतरे में है, इसके पहले भी कई पत्रकारों को निशाना बनाया गया था। आइए हाल के उन 12 वारदातों पर नजर डालें जिसमें पत्रकार की हत्या कर दी गई।

1- 13 मई 2016 को बिहार के सीवान में ऑफिस से लौट रहे हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान के पत्रकार राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जिसका आरोप राष्ट्रीय जनता दल के नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन पर है, इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।

2- मई 2015 में मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले की कवरेज करने गए आजतक के संवाददाता अक्षय सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। अक्षय सिंह की झाबुआ के पास मेघनगर में मौत हुई, मौत के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

3- साल 2015 में ही उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह को जिंदा जला दिया गया। आरोप है कि जगेंद्र सिंह ने फेसबुक पर उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री राममूर्ति वर्मा के खिलाफ खबरें लिखी थीं।

4- जून 2015 में मध्य प्रदेश में बालाघाट जिले में अपहृत पत्रकार संदीप कोठारी को जिंदा जला दिया गया था। वे खनन माफिया और चिटफंड घोटालों के खिलाफ लगातार खबरें दे रहे थे। आरोप है कि अवैध खनन में शामिल तीन लोगों ने 19 जून को संदीप कोठारी का बालाघाट के कटंगी से अपहरण कर लिया और उनको जिंदा जला दिया।

5- 26 नवंबर 2014 को आंध्रप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार एमवीएन शंकर की हत्या कर दी गई थी, एमवीएन आंध्र में तेल माफिया के खिलाफ लगातार खबरें लिख रहे थे।

6- 27 मई 2014 को ओडिसा के स्थानीय टीवी चैनल के लिए स्ट्रिंगर तरुण कुमार की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। तरुण कुमार जब अपने घर जा रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उनपर धारदार हथियार से हमला कर दिया था।

7- साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान नेटवर्क18 के पत्रकार राजेश वर्मा की गोली लगने से मौत हो गई थी।

8- 20 अगस्त 2013 को महाराष्ट्र के पत्रकार और लेखक नरेंद्र दाभोलकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

9- 1 मार्च 2012 को कुछ लोगों ने मध्यप्रदेश के रीवा में रिपोर्टर राजेश मिश्रा की हत्या कर दी थी। ख़बरों के मुताबिक, राजेश का कसूर सिर्फ इतना था कि वो लोकल स्कूल में हो रही धांधली की कवरेज कर रहे थे।

10- 11 जून 2011 को मिड डे के मशहूर क्राइम रिपोर्टर ज्योतिर्मय डे की हत्या कर दी गई थी, वे अंडरवर्ल्ड से जुड़ी कई जानकारी जानते थे।

11- 21 नवंबर 2002 को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की सिरसा में हत्या कर दी गई थी। उनके दफ्तर में घुसकर कुछ लोगों ने उनको गोलियों से भून डाला था।

12- देशबंधु के पत्रकार साई रेड्डी की छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में संदिग्ध हथियारबंद लोगों ने हत्या कर दी थी।

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