कर्नाटक: स्ट्रेचर नहीं मिला तो पति को घसीटकर ले गई महिला, ‘जनता का रिपोर्टर’ से स्वास्थ्य मंत्री बोले- अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

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भारत भले ही हेल्थ टूरिज्म का सेंटर बनता जा रहा हो और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा पा रहा हो। लेकिन सच यही है कि हमारे यहां स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमीं है, जिसे दूर किए बिना हम अन्य देशों से मुकाबला करने के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। भारत के अलग-अगल राज्यों से हर रोज कोई न कोई ऐसी तस्वीर सामने आ ही जाती है, जिसे देखकर हमें शर्मसार होना पड़ता है।ताजा मामला कर्नाटक का है, जहां स्ट्रेचर नहीं मिलने के बाद महिला अपने पति को घसीटकर एक्स-रे कराने ले गई। जी हां, मानवता को शर्मसार करने वाला यह वीडियो कर्नाटक के एक सरकारी अस्पताल से आया है। यह वीडियो देखने के बाद आप सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था और उसकी वजह से मरीजों को होने वाली परेशानियों के बारे आप अंदाजा लगा सकते हैं।

शिवमोग्गा के सरकारी अस्पताल में स्ट्रेचर नहीं मिलने की वजह से एक मजबूर पत्नी को अपने बीमार पति को घसीटते हुए एक्स-रे कराने के लिए लेकर जाना पड़ा। दमे की बीमारी की वजह से अमीर साब नाम का यह शख्स अस्पताल में काफी दिनों से भर्ती है। इसी दौरान शख्स को एक्स-रे के लिए अस्पताल के दूसरे तल से पहले तल पर आना था।

लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि उस समय अस्पताल में कोई स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था। ऐसी स्थिति में लाचार अमीर की पत्नी फातिमा को और कोई उपाय नहीं सूझा। वह पति को बेड सहित घसीटते हुए एक्स-रे रूम तक ले गई।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिया जांच के आदेश

इस मामले में कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री रमेश कुमार ने जनता का रिपोर्टर से बातचीत में कहा कि मैं अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही से बहुत दुखी हूं। उन्होंने कहा कि यह घटना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मंत्री ने बताया कि दरअसल, अस्पताल में उस दिन मरीजों की संख्या काफी ज्यादा हो गई थी, जिस वजह से उस महिला को स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो पाया।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति हमेशा उत्पन्न नहीं होती है, लेकिन कभी-कभी एकाएक मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन ऐसी घटना बहुत ही निंदनीय है। कुमार ने कहा कि हमने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए है और रिपोर्ट आने पर संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

उन्होंने बताया कि इस मरीज का पिछले तीन वर्षों से इस अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस दौरान पिछले हफ्ते मरीज को एक्स-रे के लिए दूसरे तल से पहले तल पर लेकर जाना था, लेकिन उस दिन अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी ज्यादा हो गई जिस वजह से मरीज की पत्नि को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि एक हफ्ते में मामले की रिपोर्ट आ जाएगी जिसके बाद अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कदम उठाया जाएगा।

स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोलती ऐ खबरें

कंधे पर बेटे का शव ले जाने को मजबूर हुआ पिता

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 अप्रैल को राज्य के 75 जिलों के लिए 150 एडवांस एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की थी। जिसके बाद यूपी के उप-मुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 1 मई को गायों के लिए एम्‍बुलेंस सेवा शुरू की। वहीं, दूसरी तरफ राज्य की विडंबना देखिए कि इटावा में एक पिता को एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण उसे अपने 13 वर्षीय बेटे को कंधे पर लादकर लेकर जाना पड़ा। एक राज्य के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है। जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

एम्बुलेंस नहीं मिलने से बांस-बल्ली के सहारे कंधे पर ले गए महिला का शव

वहीं, मध्यप्रदेश के सिधी जिले से 5 मई को मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई थी। जहां शव वाहन न मिलने के कारण मृतक के परिजनों को गुड़िया कोल (32) का शव अस्पताल से बल्ली के सहारे लगभग 3 किमी पैदल गांव तक ले जाना पड़ा।

photo- naidunia

एंबुलेस के लिए नहीं थे 400 रुपये इसलिए रेहड़ी पर पिता का शव ले जाने पर मजबूर हुआ बेटा

जबकि, पंजाब के जालंधर में अस्पताल से शव के लिए एंबुलेंस कथित रूप से उपलब्ध नहीं होने के बाद निजी वाहन से शव ले जाने के लिए 400 रूपए नहीं होने के कारण एक व्यक्ति को अपने पिता का शव घर ले जाने के लिए रेहड़ी का सहारा लेना पड़ा था। यह घटना 11 मई की है।

रेहड़ी
photo- दैनिक जागरण

ओडिशा में पत्नी का शव उठाकर 12 किमी चलना पड़ा

देश और दुनिया को हिला देने वाली दाना मांझी की दर्दनाक कहानी को कैसे भूल सकते हैं। ओडिशा के कालाहांडी जिले के भवानीपटना में दाना मांझी नाम के व्यक्ति को अपनी पत्नी के शव को कंधे पर रखकर 12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा था। जिस अस्पताल में महिला की मौत हुई थी, उस अस्पताल ने कथित तौर पर शव ले जाने के लिए एंबुलेंस मुहैया कराने से इनकार कर दिया था। व्यक्ति के साथ उसकी 12 वर्षीय बेटी भी थी।

बता दें कि स्वास्थ्य सुविधाओं और सेवाओं के मामले में भारत अन्य कई देशों से काफी पीछे है। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में 195 देशों की सूची में भारत 154 वें स्थान पर है। देश में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की इस हालत की पुष्टि एक अध्ययन के परिणामों से हो जाती है।

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारत बांग्लादेश, चीन, भूटान और श्रीलंका समेत अपने कई पड़ोसी देशों से पीछे है। हाल ही में मेडिकल जर्नल ‘द लैनसेट’ में प्रकाशित ‘ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिजीज स्टडी’ के अनुसार स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी 195 देशों की सूची में भारत को 154वें स्थान मिला है।

(देखें वीडियो)

 

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