सेवाओं पर GST की दरें तय: स्वास्थ्य एवं शिक्षा को मिलती रहेगी छूट, बैंकिंग-बीमा होंगे महंगे

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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने शुक्रवार(19 मई) को 4 टैक्स दरों पर अपनी सहमति जता दी है। सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य और शिक्षा को जीएसटी से बाहर रखा गया है और बहुत सारी सेवाओ को पहले की ही तरह छूट मिलती रहेगी। काउंसिल ने दूरसंचार, बीमा, होटल और रेस्तरां सहित विभिन्न सेवाओं के लिए 4 दर स्लैब 5,12,18 और 28 प्रतिशत टैक्स लगाने का फैसला किया है।

कुछ ही जिंस को छोड़कर सभी वस्तुओं के लिए जीएसटी दरों को तय कर लिया गया है। सरकार जीएसटी को 1 जुलाई से करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। काउंसिल की दो दिवसीय बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि दूरसंचार और वित्तीय सेवाओं पर 18 प्रतिशत की स्टैंडर्ड रेट से टैक्स लगेगा। ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज पर 5 फीसदी टैक्स लगेगा।

नॉन एसी रेल सफर पर छूट
सामान्य श्रेणी या नॉन एसी रेल यात्रा को जीएसटी से छूट दी गई है, जबकि वातानुकूलित टिकटों पर 5 फीसदी शुल्क लगेगा। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि मेट्रो, लोकल ट्रेन और हज यात्रा सहित तीर्थाटन यात्राओं को जीएसटी छूट जारी रहेगी।

इकॉनमी क्लास हवाई सफर पर राहत

जीएसटी व्यवस्था में बिजनस क्लास में हवाई सफर महंगा हो जाएगा। इकोनॉमी क्लास में सफर करने वालों को कुछ राहत मिलेगी। इस श्रेणी पर अब 6 की बजाय 5 प्रतिशत टैक्स लगेगा, जबकि बिजनेस क्लास के यात्रियों को 12 फीसदी टैक्स देना होगा।

सिनेमा टिकटें होंगी सस्ती
जीएसटी के तहत एंटरटेनमेंट टैक्स को सर्विस टैक्स में मिला दिया जाएगा, जबकि सिनेमा, घुड़दौड़ में बाजी लगाने या गेंबलिंग पर 28 प्रतिशत टैक्स लगेगा। सिनेमा हॉल के लिए प्रस्तावित टैक्स दरें मौजूदा दरों की तुलना में 40 से 55 प्रतिशत तक कम है। इससे जहां सिनेमा टिकटें सस्ती हो सकती हैं और उन पर शुल्क लगाने का अधिकार राज्यों के पास ही रहेगा।

फोन बिल का बढ़ेगा बोझ
टेलिकॉम सेवाओं पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा। अभी 15 प्रतिशत टैक्स लगता है। यानी 3 प्रतिशत अधिक टैक्स देना होगा।

होटल्स पर इस तरह टैक्स

प्रतिदिन 1000 रुपये का शुल्क लगाने वाले होटल और लॉज को जीएसटी में छूट रहेगी। वहीं 1000 से 2000 रुपये प्रतिदिन शुल्क वाले होटल के लिए शुल्क दर 12 प्रतिशत रहेगी। इसी तरह 2500 से 5000 रुपये प्रति दिन शुल्क वाले होटल के लिए शुल्क दर 18 प्रतिशत रहेगी। इसी तरह 5000 रुपये से अधिक प्रतिदिन शुल्क वाले होटल के लिए शुल्क दर 28 प्रतिशत होगी।जेटली ने कहा कि बिना एसी वाले रेस्तरां में खाने के बिल पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। शराब लाइसेंस वाले एसी रेस्तरां में टैक्स की दर 18 प्रतिशत रहेगी। वहीं 5 सितारा होटलों में जीएसटी की दर 28 प्रतिशत रहेगी। इसी तरह 50 लाख रुपये या कम कारोबार वाले रेस्तरां पर 5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगेगा। वहीं सफेदी (पुताई) जैसे ठेके पर किए जाने वाले काम पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।

महंगी हो जाएंगी बीमा पॉलिसियां
बीमा कवर लेना आगामी एक जुलाई महंगा हो जाएगा। जीएसटी परिषद ने इसे वित्तीय सेवा क्षेत्र के साथ मिलाने का फैसला किया है और जीएसटी व्यवस्था में इस पर 18 प्रतिशत की दर से टैक्स लगेगा। फिलहाल बीमा क्षेत्र पर सर्विस टैक्स सेस 15 प्रतिशत है।

3 पर्सेंट बढ़ेगा बोझ
ICICI लोम्बार्ड के मुख्य वित्त अधिकारी गोपाल बालाचंद्रन ने कहा कि बीमा के लिए जीएसटी की दर 18 प्रतिशत रखी गई है। इसे ग्राहकों पर कर का बोझ 15 से बढ़कर 18 प्रतिशत हो जाएगा। स्टार हेल्थ ऐंड एलॉयड के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक एस. प्रकाश ने कहा कि अब स्वास्थ्य बीमा, कारोबार करने के लिए नहीं किया जाता है। यह एक सामाजिक जरूरत है। प्रकाश ने कहा कि आकर्षक जीएसटी दर से बीमा उद्योग की पहुंच और बढ़ती।

ओला-ऊबर होंगी सस्ती
जीएसटी के तहत ऊबर और ओला जैसी ऐप आधारित टैक्सी सेवा देने वाली कंपनियों से टैक्सी की बुकिंग करना सस्ता हो जाएगा। इस तरह की सेवाएं 5 प्रतिशत टैक्स की श्रेणी में आएंगी। अभी ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं से टैक्सी बुक करने पर 6 प्रतिशत टैक्स लगता है।

विदेशी टूरिस्ट्स की यात्रा होगी महंगी
जीएसटी की जिन दरों की घोषणा की गई है उनमें पांच सितारा होटलों पर 28 प्रतिशत, एसी रेस्तरां और शराब लाइसेंस वाले रेस्तरां पर 18 प्रतिशत की दर से कर लगेगा। मार्केट के जानकारों के मुताबिक जीएसटी की ऊंची दरों का असर विदेशी पर्यटन पर पड़ेगा।

फेडरेशन ऑफ होटल्स ऐंड रेस्तरां असोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) के उपाध्यक्ष गरीश ओबरॉय ने बयान में कहा कि शुरुआती प्रतिक्रिया काफी बेचैनी की है। 28 प्रतिशत का मतलब है कि उद्योग समाप्त हो जाएगा। एचआरएडब्ल्यूआई के अध्यक्ष दिलीप दतवानी ने कहा कि सरकार को समझना चाहिए कि म्यांमार, थाइलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया और अन्य देशों में 5 से 10 प्रतिशत की दर से कर लगता है।

ई-कॉमर्स कंपनियां बिक्रेताओं पर लगाएंगी शुल्क
ई-कॉमर्स ग्राहकों पर कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है। हालांकि फ्लिपकार्ट और आमेजन जैसी कंपनियों को नई टैक्स व्यवस्था में बिक्रेताओं को किए जाने वाले भुगतान पर एक प्रतिशत कर संग्रह करना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार इस कदम से ग्राहकों पर सीधे कोई प्रभाव नहीं होगा। लेकिन इस कदम से पारदर्शिता आएगी क्योंकि कर संग्रह प्रणाली अधिक दुरुस्त होगी।

 

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