अदालत में बोले शशि थरूर- जब सुनंदा ने आत्महत्या ही नहीं की तो फिर उकसाने का मामला कैसे बना

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल की तिरुअनंतपुरम सीट से सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत के सामने दावा किया कि उनकी पत्नी सुनंदा पुष्कर के परिवार और मित्रों का अभी भी कहना है कि वह आत्महत्या नहीं कर सकती थी।

शशि थरूर

समाचार एजेंसी पीटीआई (भाषा) की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस नेता शशि थरूर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पहवा ने कहा कि अगर उन्होंने आत्महत्या नहीं की है तो फिर आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई मामला नहीं बनता है, ऐसे में मुकदमे का निपटारा कर देना चाहिए। यह दलीलें विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल की अदालत में आरोप तय करने के लिए हो रही बहस के दौरान दी गईं।

पहवा ने कहा, ‘‘उनके रिश्तेदारों और बेटे का कहना है कि वह साहसी महिला थीं और उनकी मौत आत्महत्या नहीं हो सकती है। अगर उन्होंने आत्महत्या नहीं की है तो फिर आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई मामला कैसे बन सकता है।’’ उन्होंने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में असफल रहा है कि यह आत्महत्या का मामला है।

अदालत ने मामले में सुनवाई के लिए नौ अप्रैल की तारीख तय की है। उन्होंने पहले कहा था कि पोस्टमॉर्टम और अन्य मेडिकल रिकॉर्ड से पहले ही तय हो चुका है कि यह आत्महत्या या हत्या का मामला नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि किसी भी गवाह ने उनके (थरुर) खिलाफ दहेज, प्रताड़ना या क्रूरता का आरोप नहीं लगाया है।

बता दें कि, शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर का शव 17 जनवरी, 2014 की रात को दिल्ली के एक लक्जरी होटल के कमरे से मिला था। थरुर दंपति उस दौरान होटल में रह रहा था क्योंकि उनके सरकारी बंगले में मरम्मत का काम चल रहा था।

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