देश की राजधानी दिल्ली के इंडिया गेट पर ‘लव जिहाद’ के खिलाफ हिंदी समाचार चैनल सुदर्शन के संपादक सुरेश चव्हाणके ने रविवार (1 नवंबर) को विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन का नाम उन्होंने ‘जनता मार्च’ दिया था। इस प्रदर्शन के दौरान सुदर्शन न्यूज़ ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने संत, महिलाओं के साथ बदसलूकी भी की। सुदर्शन ने आरोप लगाया कि, प्रदर्शन पर हमले का आदेश देने वाले अधिकारी का नाम मुस्लिम था। वहीं, सुदर्शन के इन सभी आरोपों को दिल्ली पुलिस ने खारिज किया है। पुलिस ने उनके ट्वीट को ‘भ्रामक और शरारती’ बतया है।
सुरेश चव्हाण के नेतृत्व वाले सुदर्शन न्यूज़ ने अपने एक ट्वीट में लिखा, “जनता मार्च पर हमले का आदेश देने वाले दिल्ली पुलिस के अधिकारी का नाम- “सरफराज” हैं। #ShameOnDelhiPolice”। सुदर्शन न्यूज़ के इस ट्वीट पर दिल्ली पुलिस ने भी अपनी प्रतिक्रियां दी हैं। पुलिस ने सुदर्शन के सभी आरोपों को खारिज किया है।
#जनता_मार्च पर हमले का आदेश देने वाले @DelhiPolice के अधिकारी का नाम – " #सरफराज "#ShameOnDelhiPolice@CPDelhi @HMOIndia @AmitShah
— Sudarshan News (@SudarshanNewsTV) November 1, 2020
दिल्ली पुलिस ने अपने ट्वीट में लिखा, “सुदर्शन न्यूज टीवी के वीरेंद्रजीत शर्मा और श्री सुरेश चव्हाणके ने इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बारे में ट्वीट किया था। नई दिल्ली जिला के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें टेलीफोन पर सलाह दी कि वे जंतर मंतर पर निर्धारित स्थान पर ही इस तरह के विरोध प्रदर्शन का आयोजन करें, जिसके लिए वे सहमत हो गए थे।”
The senior officers of New Delhi District telephonically advised them to organize such protest only at the designated place at Jantar Mantar to which they agreed.
— #DilKiPolice Delhi Police (@DelhiPolice) November 1, 2020
पुलिस ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, “हालांकि, अपने शब्द पर वापस जाते हुए उन्होंने 144 CRPC और DDMA दिशानिर्देशों के तहत निरोधात्मक आदेशों का उल्लंघन करते हुए इंडिया गेट के पास मानसिंह रोड पर जमकर तोड़फोड़ की। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और अन्य को अवैध धरना से हटा दिया।”
दिल्ली पुलिस ने अपने ट्वीट में आगे कहा, “अब वे अपनी अवैध विरोध प्रदर्शन को सही ठहराने के लिए पूरी तरह से झूठ फैला रहे हैं। उनका ट्वीट पूरी तरह से भ्रामक और शरारती है। महिलाओं या किसी संत के साथ किसी ने भी दुर्व्यवहार नहीं किया। कथित रूप से ऐसा कोई अधिकारी ड्यूटी पर नहीं था, जिसका नाम ट्वीट में लिया गया है। बल में सभी अधिकारी अपनी जाति, पंथ और धर्म के बावजूद कानून प्रवर्तन अधिकारी हैं।”
Now they are spreading total falsehood to justify their illegal assembly.The tweet is wholly misleading & mischievous. No one misbehaved with women or any saint as alleged. No such officer as alleged in the tweet was on duty.
— #DilKiPolice Delhi Police (@DelhiPolice) November 1, 2020