रिपब्लिक टीवी के संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने अपने समर्थकों के लिए की भावुक टिप्पणी

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फर्जी टेलीविन रेटिंग प्वाइंट्स (टीआरपी) रैकेट में मुंबई पुलिस की तरफ से आरोपी बनाए जाने के बाद विवादों में घिरे अंग्रेजी समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के विवादास्पद एंकर और संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने अपने समर्थकों के लिए एक भावुक टिप्पणी की है।

अर्नब गोस्वामी

अर्नब गोस्वामी के एक नोट में लिखा, “मेरे और रिपब्लिक के साथ चलने वाले सभी लोगों के लिए, मैं बहुत आभारी और अभिभूत हूं। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हमारे खिलाफ पूरे राज्य की मशीनरी तैनात की गई है। लेकिन वे नागरिकों को कानून तोड़ने के बिना शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने से रोक नहीं सकते। मुंबई में चलने के लिए नागरिकों से पूछताछ क्यों की गई? क्या चलना भी अपराध है? पुलिस ने यह पूछने की हिम्मत कैसे की कि चलने के पीछे कोई साजिश थी? हम सभी देश में कहीं भी घूम सकते हैं और खुलकर बात कर सकते हैं। हमें अब संयमित या आतंकित नहीं किया जाएगा। यह एक स्वतंत्र देश है।”

बता दें कि, रिपब्लिक टीवी ने हाल ही में गोस्वामी की तस्वीर वाले टी-शर्ट पहनकर चलने वाले लोगों के एक समूह का वीडियो प्रसारित किया था। रिपब्लिक टीवी के अनुसार, इसके संपादक के समर्थन में टहलने वालों को रोका गया और मुंबई पुलिस ने उनसे ‘पूछताछ’ की।

गौरतलब है कि, फर्जी टीआरपी रैकेट में मुंबई पुलिस की तरफ से आरोपी बनाए जाने के बाद समाचार चैनल रिपब्लिक टीवी के संस्थापक और एंकर अर्नब गोस्वामी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। रिपब्लिक टीवी ने दावा किया कि उसके वरिष्ठ सदस्यों से अब तक 150 घंटे की पूछताछ की गई है।

मुंबई पुलिस द्वारा पूछताछ किए जाने वालों में आउटपुट एडिटर सागरिका मित्रा भी शामिल हैं, वरिष्ठ एसोसिएट एडिटर शिवानी गुप्ता को मुंबई पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था। इससे पहले, रिपब्लिक टीवी के वरिष्ठ एसोसिएट एडिटर शवन सेन और कार्यकारी संपादक निरंजन नारायणस्वामी से भी पूछताछ की गई थी।

फर्जी TRP केस में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस केस में फख्त मराठी चैनल और बॉक्स सिनेमा के मालिक पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। अब मामले में पांच चैनल सीधे तौर पर आरोपी हो गए हैं। मुंबई पुलिस ने बीते दिनों टीआरपी घोटाले का दावा किया था। मुंबई के पुलिस कमिश्‍नर परमबीर सिंह ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में इस फर्जीवाड़े की जानकारी दी थी। उन्‍होंने कहा था कि इसमें रिपब्लिक टीवी समेत कुछ चैनल्‍स शामिल हैं।

यह कथित फर्जी टीआरपी घोटाला तब सामने आया जब रेटिंग एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने हंसा रिसर्च ग्रुप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई कि कुछ चैनल विज्ञापनदाताओं को आकर्षित करने के लिए टीआरपी अंक के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। आरोपी है कि दर्शक संबंधी आंकड़े के संग्रहण के लिए जिन परिवारों में मीटर लगाये गये थे और उनमें से कुछ को कुछ खास चैनल देखने के लिए रिश्वत दी जाती थी।

3 COMMENTS

  1. दुष्टों का समर्थन करने वाले लोग भी दुष्ट ही होते हैं

  2. आदमी जब गलत काम करता है तो वह अन्दर से भयभीत रहता है और अपने भय को छिपाने के लिए गलत पे गलत काम करता जाता है। नतीजा उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। फिर वो ऐसे काम करने लगता है जो पागल करता है। निदान- उसे पागलखाना भेजा जाये फिर जब वो ठीक हो जाता है तो उसके गलत कर्मों की सज़ा कानून अपने हिसाब से दे। वो पागल कौन है जो पत्रकारों के पीछे गुलाम की तरह दौर रहा है। आप समझ गए होंगे।

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