फर्जी TRP केस: अर्नब गोस्वामी को बड़ा झटका, मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के मालिकों और आला अधिकारियों को बनाया आरोपी

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फर्जी टेलीविन रेटिंग प्वाइंट्स (टीआरपी) रैकेट में मुंबई पुलिस की तरफ से आरोपी बनाए जाने के बाद समाचार चैनल रिपब्लिक टीवी के संस्थापक और एंकर अर्नब गोस्वामी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। इस बीच, मुंबई पुलिस ने आधिकारिक तौर पर रिपब्लिक टीवी, हिंदी समाचार चैनल ‘न्यूज नेशन’ और महामूवी चैनल के मालिकों और अधिकारियों को फर्जी TRP केस में आरोपी बनाया है। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा द्वारा शनिवार को मुंबई की एक स्थानीय अदालत को सूचित किए जाने के बाद यह खुलासा हुआ।

अर्नब गोस्वामी

यह सारा घटनाक्रम तब सार्वजनिक हुआ जब मुंबई पुलिस ने इस केस में 20 अक्टूबर को गिरफ्तार दो आरोपियों रामजी वर्मा और दिनेश विश्वकर्मा को नई रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष शनिवार को पेश किया। बता दें कि, इस केस में फख्त मराठी चैनल और बॉक्स सिनेमा के मालिक पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। अब पांच चैनल सीधे तौर पर फर्जी TRP केस में आरोपी हो गए हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने टीआरपी घोटाले मामले में रिपब्लिक टीवी, हिंदी समाचार चैनल ‘न्यूज नेशन’ और महामूवी चैनल के मालिकों को आरोपी बनाय गया है। हालांकि इनके मालिक कौन हैं, उनके नाम को नहीं बताया गया है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) मिलिंद भरम्बे ने कहा, “हमने अभी तक किसी का नाम नहीं लिया है।”

फर्जी TRP केस में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस केस में फख्त मराठी चैनल और बॉक्स सिनेमा के मालिक पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। अब मामले में पांच चैनल सीधे तौर पर आरोपी हो गए हैं। मुंबई पुलिस ने बीते दिनों टीआरपी घोटाले का दावा किया था। मुंबई के पुलिस कमिश्‍नर परमबीर सिंह ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में इस फर्जीवाड़े की जानकारी दी थी। उन्‍होंने कहा था कि इसमें रिपब्लिक टीवी समेत कुछ चैनल्‍स शामिल हैं।

यह कथित फर्जी टीआरपी घोटाला तब सामने आया जब रेटिंग एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने हंसा रिसर्च ग्रुप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई कि कुछ चैनल विज्ञापनदाताओं को आकर्षित करने के लिए टीआरपी अंक के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। आरोपी है कि दर्शक संबंधी आंकड़े के संग्रहण के लिए जिन परिवारों में मीटर लगाये गये थे और उनमें से कुछ को कुछ खास चैनल देखने के लिए रिश्वत दी जाती थी।

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