दिल्ली: आम आदमी पार्टी को मिली करारी हार के बाद अलका लांबा ने गिनाई पार्टी की यह ‘बड़ी गलतियां’

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लोकसभा चुनाव 2019 में दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) की राजधानी में बुरी तरह हार हुई है। आम आदमी पार्टी दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों में से एक पर भी जीत दर्ज नहीं कर सकी। इतना ही नहीं उसके तीन उम्मीदवार तो अपनी जमानत तक नहीं बचा पाएं। पार्टी के जिन उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है, उनमें चांदनी चौक सीट से पंकज गुप्ता, नई दिल्ली सीट से ब्रजेश गोयल और उत्तर पूर्वी सीट से दिलीप पांडे शामिल हैं।

अलका लांबा
फाइल फोटो: @LambaAlka

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) को मिली करारी हार के बाद चांदनी चौक से विधायक अलका लांबा ने ट्वीट कर पार्टी की कुछ बड़ी गलतियों को उजार किया है। उन्होंने अपने ट्वीट के माध्यम से बताया कि किन-किन कारणों की वजह से पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस हार से पार्टी को सबक लेने की जरूरत है।

अलका लांबा ने अपने ट्वीट में लिखा, “काश किसी की कुछ तो सुनी होती, जीतते ना सही, कम से कम जमानत तो जप्त ना होती। 2015 में 70 में से 67 जीतने वाले, 2019 आते आते 7 में से 3 पर जमानत ही जप्त करवा बैठे। अभी भी देर नही हुई, जनता को हमेशा एक अच्छे विकल्प की तलाश रहती है। बस जरूरत है फ़ालतू के घमंड को छोड़कर, हार से सबक लेने की।”

इसके बाद अलका लांबा ने एक अन्य ट्वीट में आम आदमी पार्टी (आप) की कुछ बड़ी गलतियां बताते हुए लिखा, “आप की सबसे बड़ी गलती: जनता के लिये अनजान चेहरों को मैदान में उतारना, सबका पहला चुनाव। विधायकों को विश्वास में ना लेना, बिना संगठन से बात किये उम्मीदवार तय करना, मुद्दे तय करना, अपनी पहचान खोकर, महागठबंधन में शामिल होना, कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर पूरी तरह उसके सामने झुक जाना।”

बता दें कि, दिल्ली की सात सीटों पर पूरे दमखम से लड़ रही सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। इतना ही नहीं उसके 3 उम्मीदवार तो अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। पिछले साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने दिल्ली की सभी सातों सीटों पर जीत दर्ज की थी।

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  1. मुंबई में भी काफी कार्यकर्ता नाराज़ है। डिक्टेटर शिप का अहसास कर रहे है। वैसे भा ज पा में भी तो डिक्टेटर शिप ही है। फिर भी वहां क्यूं को कार्यकर्ता आवाज़ नहीं उठता? हां वैसे से मुंबई में कार्यकर्ता जो 5 साल पहले बन गए वो बन गए अब नए बानाना नुस्किल। ओर जो पुराने पोस्ट पकड़ कर बैठे है वो सिर्फ बातें करते है काम कम होता है। इसका एक कारण मुंबई को पिछले 4 3 सालों से असमंजस सा माहौल का सामना करना पड़ रहा है। सगंठन ठीक से नहीं बना। है ही नहीं। ओर रही देल्ही की बात। 7 सीट से दो तो पूर्ण राज्य बनाएंगे वाली बात लोगों को समझ नहीं आई। क्यूं की यह लोक सभा का चुनाव था। लोग प्रधान मंत्री कौन बनना चाहिए उस दुविधा में थे। सर्जिकल ओर एयर स्ट्राइक ने भाजपा को काफी मदद की। तो मोदी के खिलाफ टिप्पणी लोगो ने पसंद नही की।

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