प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार 19 जनवरी की रात हिंदी समाचार चैनल जी न्यूज़ को एक इंटरव्यू दिया था। इस इंटरव्यू में पीएम मोदी ने राजनीति, अर्थव्यवस्था, अंतराष्ट्रीय मसले, जीएसटी, नोटबंदी और रोजगार जैसे कई मुद्दों पर बात की। लेकिन इस इंटरव्यू में रोजगार के मुद्दे पर पीएम मोदी ने ऐसा उदाहरण दिया कि ट्विटर पर आज भी उन्हें ट्रोल किया जा रहा है।
फाइल फोटो- कांग्रेस सांसद शशि थरूरजी न्यूज को दिए इस इंटरव्यू में जब एंकर सुधीर चौधरी ने सरकार द्वारा किए गए रोजगार के अवसर पैदा करने के वादे के मामले पर सवाल किया तब उन्होंने कहा था कि अगर जी टीवी के बाहर कोई व्यक्ति पकौड़ा बेच रहा है तो क्या वह रोजगार होगा या नहीं? पीएम मोदी द्वारा पकौड़े की दुकान लगाने को रोजगार बताने के बाद से सोशल मीडिया पर उनका जमकर मजाक उडाया जा रहा है।
इस बीच अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल की तिरुअनंतपुरम सीट से सांसद शशि थरूर ने तंज कसा है। शशि थरूर ने सोमवार सुबह ट्वीट कर लिखा कि, ‘जिसने कहा कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा, वह आज पकौड़े की बात करने लगे हैं। वह नहीं समझते कि लोग चाय और पकैड़े इसलिए बेच रहे हैं क्योंकि रोजगार नहीं है।’
शशि थरूर ने इसके साथ ही अपनी एक खबर भी ट्वीट की, जिसमें उन्होंने कहा कि यह बीजेपी सरकार का आखिरी बजट होगा और इसलिए वह टैक्स में छूट या निवेश के लिए कुछ प्रोत्साहन के जरिए राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करेगी।
बता दें कि, इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भी रविवार (28 जनवरी) को सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पकौड़ा बेचना भी नौकरी है तो फिर भीख मांगने को भी रोजगार के एक विकल्प के तौर पर देखना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने रविवार सुबह ट्वीट किया, ‘अगर पकौड़े बेचना भी नौकरी है तो प्रधानमंत्री के इस तर्क के मुताबिक भीख मांगना भी जॉब है। अब उन गरीब और अक्षम लोगों को भी रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या में गिन लेना चाहिए, जिन्हें मजबूरी में भीख मांगकर गुजारा करना पड़ रहा है’।
एक बाद एक किए गए कई ट्वीट्स में चिदंबरम ने कहा कि सरकार नौकरियों के अवसर पैदा करने मामले में पूरी तरह से फेल है और उसे कुछ सूझ नहीं रहा है।
बता दें कि, इससे पहले पाटीदार नेता हार्दिक पटेल भी पीएम मोदी पर उनकी पकौड़े वाली बात को लेकर हमला बोल चुके है। हार्दिक पटेल ने 22 जनवरी को ट्वीट कर कहा था कि, ‘बेरोज़गार युवा को पकौड़े का ठेला लगाने का सुझाव एक चायवाला ही दे सकता है, अर्थशास्त्री ऐसा सुझाव नहीं देता!’