उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर पिछले दिनों हुए विवाद पर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने पहली बार अपनी बात रखी है। उन्होंने पूछा है कि अगर कोलकाता में विक्टोरिया मेमोरियल हो सकता है तो एएमयू में जिन्ना की तस्वीर क्यों नहीं हो सकती है?
अंसारी ने अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगाने में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा, “अब विक्टोरिया मेमोरियल है तो है। तस्वीरों और इमारतों पर हमला करना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है।”
पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘यह एक पुरानी परंपरा है कि स्टूडेंट यूनियन पब्लिक पर्सनैलिटी का सम्मान किया जाता है। पहली बार मोहनदास करमचंद गांधी का सम्मान किया गया था। जिसका भी सम्मान होता है, उसकी तस्वीर वहां लगाई जाती है। पीएम मोरारजी देसाई, मदर टेरेसा, खान अब्दुल गफ्फार खान का सम्मान किया गया और इनकी तस्वीर लगाई गई।’
उन्होंने आगे कहा, ‘जिन्ना का भी सम्मान किया गया और उनकी तस्वीर लगाई गई। वह करीब 1983 के आसपास वहां गए थे। उनकी तस्वीर वहां होने में बुराई क्या है? अगर कोलकाता में विक्टोरिया मेमोरियल हो सकता है तो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में जिन्ना की तस्वीर क्यों नहीं हो सकती है? हमारी परंपरा इस तरह भवनों और तस्वीरों पर हमला करने की नहीं रही है।’
बता दें कि पिछले दिनों AMU में विवाद तब शुरू हुआ जब अलीगढ़ से सांसद सतीश गौतम ने एएमयू के छात्र संघ कार्यालय की दीवारों पर पाकिस्तान के संस्थापक की तस्वीर लगी होने पर आपत्ति जताई। दरअसल, एएमयू के यूनियन हॉल में जिन्ना की तस्वीर लगाने से नाराज हिंदू युवा वाहिनी के कुछ कार्यकर्ताओं ने दो मई को परिसर में घुसकर नारेबाजी की थी। उन पर मारपीट और भड़काऊ नारेबाजी करने के आरोप हैं।
एएमयू छात्रसंघ ने हिंदू युवा वाहिनी के प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। इस मांग के समर्थन में परिसर के गेट पर एकत्र हुए एएमयू छात्रों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस द्वारा किए गए बलप्रयोग में एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी और छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष एम. हुसैन जैदी समेत छह लोग घायल हो गए थे।
अल्पसंख्यकों में असहजता की भावना
अखबार से बातचीत के दौरान हामिद अंसारी ने कहा कि भारत के मुसलमानों में असहजता का माहौल है। उन्होंने कहा, ‘देश के मुसलमान चिंतित हैं। धार्मिक अल्पसंख्यकों में असहजता की भावना है और इस मुद्दे को संबोधित किए जाने की जरूरत है।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर संबोधित करना चाहिए, तो उन्होंने कहा, ‘मैं कोई नहीं हूं, जो पीएम को बताए कि उन्हें क्या कहना चाहिए और क्या नहीं। एक नागरिक के तौर पर, चाहे मेरा कोई भी नाम हो, राज्य, आस्था या खानपान हो, मेरे वे सभी अधिकार और जिम्मेदारियां हैं, जो किसी और के हैं। देश का मुस्लिम नागरिक अब भी देश का मुस्लिम नागरिक है। भारत में, मुसलमान दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम बॉडी हैं।’



















