जिन्ना तस्वीर विवाद: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने AMU छात्रों की मांग का किया समर्थन, कार्यक्रम से ठीक पहले हुए प्रदर्शन के समय पर उठाए सवाल

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उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर जारी घमासान बढ़ता ही जा रहा है। इस विवाद में एक के बाद एक राजनीतिक दल के नेता कूदते जा रहे हैं। वहीं अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी इस मुद्दे के जरिए राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास कर रही है। लेकिन सबसे खास बात यह है कि बीजेपी-आरएसएस की तमाम कोशिशों के बावजूद अलीगढ़ में अभी भी सौहार्द कायम है।

File Photo: NDTV

इस बीच एएमयू के छात्र रहे और भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। अंसारी ने एएमयू कैंपस के बाहर प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई की मांग करने वाले एएमयू छात्रों की मांग का समर्थन किया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि उनके कार्यक्रम से ठीक पहले हंगामा खड़ा करने वालों की नीयत पर भी कई सवाल उठते हैं।

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक हामिद अंसारी ने गत दो मई को जिन्ना की तस्वीर को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में हंगामा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की एएमयू छात्रों की मांग का शनिवार (12 मई) को समर्थन किया। अंसारी ने कहा कि परिसर में घुसे लोगों के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन प्रशंसनीय है।

बता दें कि एएमयू परिसर में हंगामा उस समय हुआ था जब अंसारी एक कार्यक्रम के लिए वहां मौजूद थे। उस कार्यक्रम में उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन का आजीवन सदस्य के रूप में सम्मानित किया जाना था। हालांकि कार्यक्रम दक्षिणपंथी हिंदू कार्यकर्ताओं की कथित हिंसा के चलते रद्द कर दिया गया था।

एएमयू में पढ़ाई कर चुके अंसारी ने कहा कि बाधा डाला जाना, उसका समय तथा ‘‘उसे सही ठहराने के लिए गढ़ा गया बहाना” सवाल उठाता है। उन्होंने एएमयू छात्र संघ को लिखे एक पत्र में लिखा है कि इसको लेकर (एएमयू) छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन प्रशंसनीय है। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह किसी भी तरह से उनके शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित नहीं करे।’’

पूर्व उपराष्ट्रपति अंसारी ने कहा कि गत दो मई के कार्यक्रम के बारे में सार्वजनिक जानकारी थी जिसमें केनेडी आडिटोरियम में उनका एक संबोधन भी शामिल था। संबंधित प्राधिकारियों को आधिकारिक रूप से जानकारी दी गई थी और वे ऐसे मौकों पर होने वाली सुरक्षा सहित मानक व्यवस्था से अवगत थे।

उन्होंने कहा, ‘इसके मद्देनजर परिसर में घुसे लोगों का विश्वविद्यालय गेस्ट हाउस तक पहुंचना अभी भी रहस्य बना हुआ है जहां मैं ठहरा हुआ था।’ पूर्व उपराष्ट्रपति अंसारी ने उन्हें सम्मान देने के लिए एएमयू छात्र संघ और उसके पदाधिकारियों का धन्यवाद किया।

अंसारी ने कहा कि छात्रों की बाहरी लोगों और हंगामा करने वालों के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग न्यायोचित है। एएमयू स्टूडेंट यूनियन को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि एएमयू के प्रशासन ने भी इस तरह का आग्रह किया है। बता दें कि एएमयू में चल रहे छात्रों के आंदोलन का दायरा व्यापक होता जा रहा है और अब यह सिर्फ छात्र आंदोलन का ही केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता का भी प्रतीक बनता जा रहा है।

एएमयू के आंदोलन में शिरकत करने के लिए बड़ी तादाद में देश भर से गैर-मुस्लिम आंदोलनकारी और बुद्धिजीवी भी शामिल हो रहे हैं। AMU की ओर से परीक्षा कार्यक्रम जारी करने और अलीगढ़ प्रशासन और राज्य सरकार की हठधर्मिता के वावजूद छात्रों ने आंदोलन की आंच को धीमी नहीं होने दी है। दरअसल, जानकारों का कहना है कि AMU छात्रसंघ द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन की सबसे बड़ी जीत यह है कि इन्होंने अपने फोकस को जरा भी भटकने नहीं दिया है।

वे जिन्ना की तस्वीर को लेकर जारी विवाद पर कुछ भी बोल नहीं रहे हैं। उनकी मांग है कि देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर हमला करने वालों के खिलाफ और छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हो और घटना की हाईकार्ट के जज से समयबद्ध न्यायिक जांच हो। इस मांग को लेकर ही ये आंदोलन चल रहा है और इसके समर्थन में देश-विदेश से लोग जुट रहे हैं।

क्या है मामला?

बता दें कि AMU में विवाद तब शुरू हुआ जब अलीगढ़ से सांसद सतीश गौतम ने एएमयू के छात्र संघ कार्यालय की दीवारों पर पाकिस्तान के संस्थापक की तस्वीर लगी होने पर आपत्ति जताई। दरअसल, एएमयू के यूनियन हॉल में जिन्ना की तस्वीर लगाने से नाराज हिंदू युवा वाहिनी के कुछ कार्यकर्ताओं ने दो मई को परिसर में घुसकर नारेबाजी की थी। उन पर मारपीट और भड़काऊ नारेबाजी करने के आरोप हैं।

एएमयू छात्रसंघ ने हिंदू युवा वाहिनी के प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। इस मांग के समर्थन में परिसर के गेट पर एकत्र हुए एएमयू छात्रों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस द्वारा किए गए बलप्रयोग में एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी और छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष एम. हुसैन जैदी समेत छह लोग घायल हो गए थे।

3 मई से छात्रों का प्रदर्शन जारी

इस घटना के बाद एएमयू के छात्रों ने तीन मई से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया, जो आज भी जारी है। एएमयू के बाब-ए-सैयद गेट के पास अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन कर रहे छात्र वहीं पर जुमे की नमाज भी अदा कर रहे हैं। एएमयू टीचर्स एसोसिएशन ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर उनसे विश्वविद्यालय परिसर में हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं द्वारा अराजकता फैलाए जाने के घटनाक्रम की फौरन उच्चस्तरीय जांच कराने की गुजारिश की है। प्रशासन ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वह रमजान से पहले ही इस मामले की जांच आदि पूरी करा लेना चाहता है।

एसोसिएशन के सचिव प्रोफेसर नजमुल हसन ने बताया कि संगठन ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है कि वह इस मामले को गंभीरता से लें, क्योंकि यह पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि दो मई को पुलिस हिंदू युवा वाहिनी के गुंडों को रोकने के बजाय तमाशबीन बनी रही। जिन्ना की तस्वीर विवाद पर विश्वविद्यालय के कुलपति का कहना है कि यह तस्वीर स्टूडेंट यूनियन के हॉल में लगी है और यह कोई नई बात नहीं है। उनका कहना है कि यह तस्वीर 1938 से ही लगी है।

15 यूनिवर्सिटी के छात्रों ने किया समर्थन 

जिन्ना की तस्वीर हटाने को लेकर छिड़े विवाद के बीच पिछले एक सप्ताह से धरने पर बैठे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के छात्रों ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया है। एएमयू प्रशासन की ओर से गठित ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने मंगलवार को धरना खत्म कराने का प्रयास जरूर किया, लेकिन बात नहीं बनी। छात्र संघ अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में दोहराया कि छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों और भड़काऊ व उकसाने वाले कृत्य के लिए हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं के खिलाफ जब तक कार्रवाई नहीं होती, धरना जारी रखेंगे।

‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने कहा कि हमारे आंदोलन को देश भर विश्वविद्यालयों से भारी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू), जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (JMI) और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) सहित विश्व भर के करीब 15 यूनिवर्सिटी के छात्रों ने हमारे आंदोलन का समर्थन किया है। मशकूर ने कहा कि जब तक प्रशासन द्वारा हमारी मांग को मान नहीं लिया जाता है तब तक छात्रों का प्रदर्शन जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि आरएसएस के गुंडों द्वारा पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर जिस प्रकार से हमला करने की कोशिश की गई और एएमयू में अराजकता फैलाया गया वह शर्मनाक है। मशकूर ने बताया कि अगर प्रशासन द्वारा हमारी मांगों को मान भी लिया जाता है तब भी आरएसएस के विचारों के खिलाफ जो हमारा आंदोलन है वह आगे भी जारी रहेगा और हम इस आंदोलन को लेकर पूरे देश भर में जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें देश भर के सभी धर्म के छात्रों द्वारा भारी समर्थन मिल रहा है।

एएमयू कुलपति ने की न्यायिक जांच की मांग

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कुलपति तारिक मंसूर ने हाल में परिसर में हुई हिंसक घटनाओं की एक न्यायिक जांच की मांग की और प्रदर्शनकारी छात्रों पर ‘अत्यधिक बल’ प्रयोग की निंदा की है। हड़ताली छात्रों से अपने भविष्य को खतरे में नहीं डालने की अपील करते हुए मंसूर ने कहा कि उन्होंने न्यायिक जांच की मांग का समर्थन करके एएमयू समुदाय की सभी चिंताओं व भावनाओं को व्यक्त किया है।

उन्होंने कहा, “किसी भी परिस्थिति में छात्रों को अपनी पढ़ाई में नुकसान नहीं उठाना चाहिए, खास तौर से जब परीक्षा नजदीक हो। मैं सभी छात्रों से शांति बनाए रखने और पूरे मन से अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने व अपने करियर में अच्छा प्रदर्शन करने की अपील करता हूं।” मंसूर ने कहा, “मैं हमारे छात्रों का दुख समझता हूं।” उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में भर्ती घायल छात्रों से मिलकर उन्हें बहुत दुख हुआ। कुलपति ने अपनी पत्नी के साथ आंदोलन स्थल का दौरा किया।

तारिक मंसूर ने एक अपील में कहा, “प्रिय छात्रों कुछ ताकतों के जाल में नहीं फंसना चाहिए, जो हमारे शिक्षा संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में जुटी हैं और आपके उज्जवल भविष्य से खेल रही हैं।” उन्होंने कहा कि चूंकि एएमयू एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है, “मीडिया का एक वर्ग अधूरे तथ्यों के साथ विश्वविद्यालय की लगातार एक नकारात्मक छवि गढ़ने की कोशिश कर रहा है।”

उन्होंने कहा, “विभिन्न समूहों की तरफ से विश्वविद्यालय पर हमला, भावनाओं में बहे बगैर बौद्धिक प्रतिकार और वैचारिक कार्रवाई की मांग करता है।” उन्होंने कहा, “मैं पहले ही हमारे छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा कर चुका हूं, जिससे मौजूदा व पूर्व एएमयू छात्र संघ के पदाधिकारियों व दूसरे छात्रों को चोटें आई हैं।”

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