भारत भले ही हेल्थ टूरिज्म का सेंटर बनता जा रहा हो और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही हो। लेकिन सच यही है कि हमारे यहां स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमीं है। भारत के अलग-अगल राज्यों से हर रोज कोई न कोई ऐसी तस्वीर सामने आ ही जाती है, जिसे देखकर हमें शर्मसार होना पड़ता है। जिसका ताजा मामला अब बिहार से सामने आया है जो कि इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के पूर्णिया सदर अस्पताल में पत्नी की मौत के बाद जब शव वाहन नहीं दिया गया तो मजबूर गरीब पति शव को बेटे के साथ बाइक पर ले जाने को मजबूर हो गया। इस फोटो में आप देख सकते है कि, शव को बीच में गमछा के सहारे अपने शरीर से बेटे ने बांधा और पीछे उसे संभालकर पति बैठ गए।
मामला प्रकाश में आने के बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता का संज्ञान लेते हुए जांच टीम गठित कर दी है। ख़बरों के अनुसार, जांच टीम ने पीडि़त परिवार से बातचीत की है और जांच टीम सोमवार (5 जून) तक अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी।
Bihar: Man in Purnia carried wife's body on a motorcycle to reach home for last rites as he was denied mortuary van at a Government hospital pic.twitter.com/tu9tdcFQAP
— ANI (@ANI) June 4, 2017
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना के बारे में सिविल सर्जन ने कहा कि सदर अस्पताल में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से शव वाहन उपलब्ध कराया जाता है जो बीपीएल परिवारों के लिए निश्शुल्क होता है। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन से इसकी मांग की जाती है। वहीं इस मामले पर सिविल सर्जन ने कहा कि मृतक के परिवार ने शव वाहन की मांग नहीं की थी।
गौरतलब है कि, पूर्णिया जिले में श्रीनगर पुलिस स्टेशन के तहत रानीबाड़ी गांव का रहने वाला शंकर साह (60) की 50 वर्षीय पत्नी सुशीला देवी का शुक्रवार को पूर्णिया सदर अस्पताल में बीमारी के कारण निधन हो गया था। मौत के बाद उसके पति ने अस्पताल से पत्नी के शव को अंतिम संस्कार के लिए घर ले जाने के लिए मूर्दाघर वैन की मांग की, मगर उसकी मांग को अस्पताल ने ठुकरा दिया, जिसके कारण उसे अपनी मृत पत्नी के शव को बाइक पर किसी तरह से ले जाना पड़ा। जानकारी के अनुसार, पिता और पुत्र मजदूर हैं और पंजाब में मजदूरी करते हैं।