गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) समर्थकों की पुलिस के साथ भिड़ंत के बाद गुरुवार(8 जून) को अशांत पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में सेना को तैनात करना पड़ा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार को कैबिनेट की बैठक कर रही थी तभी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की और कुछ को आग के हवाले कर दिया।
PTI Photoइससे पहले पुलिस ने कैबिनेट बैठक की जगह जाने की कोशिश कर रहे जीजेएम समर्थकों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। वे पहाड़ के स्कूलों में बंगाली भाषा ‘थोपने’ का विरोध कर रहे थे। अभी पर्यटकों की भारी मौजूदगी वाला यह पहाड़ी शहर पिछले कुछ महीनों से शांत था।
ताजा हिंसा गुरुवार को अपराह्न उस वक्त भड़की जब बिमल गुरंग के नेतृत्व वाली पार्टी ने गुरुवार को राजभवन तक विरोध मार्च का आह्वान किया। राजभवन में उस वक्त कैबिनेट की बैठक चल रही थी। जीजेएम समर्थकों ने पुलिस द्वारा खड़े किये गये बैरीकेड तोड़ने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों पर पथराव भी किया।
पुलिस सूत्रों ने कहा कि उन्होंने पुलिस की कई गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया और कुछ वाहनों में आग भी लगा दी। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी घायल भी हो गए। सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि ‘प्रदेश सरकार से अनुरोध मिला है। दार्जिलिंग में स्थित सेना की दो टुकड़ियों (प्रत्येक में 80 जवान) को भेजा गया है।’ प्रदर्शनकारी ‘स्कूलों में बांग्ला भाषा लागू किये जाने का विरोध’ समेत कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के संस्थापक बिमल गुरंग ने कहा कि मैं सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं जो तीन दिवसीय रैली में हिस्सा लेने दूर-दूर से आए। उन्होंने कहा कि सड़कों पर उतरेंगे लोग अपनी भाषा को बचाना चाहते हैं।गौरतलब है कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा एक अलग गोरखालैंड की मांग कर रहा है। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने तृणमूल कांग्रेस पर ‘फूट डालो राज करो की नीति’ के तहत दार्जिलिंग की शांतिभंग करने की कोशिश का आरोप लगाया है।