एकता की मिसाल: जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में मुसलमान युवकों ने हिन्दू पंडित का किया अंतिम संस्कार

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जम्मू-कश्मीर में लगातार बढ़ रहें तनाव के बीच एक ऐसी ख़बर सामने आई है जो अपने आप में सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल पेश करती है जो एकता का संदेश देती है।

जम्मू-कश्मीर
फोटो- जनसत्ता

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में करीब 3000 लोगों ने मिलकर एक स्थानीय कश्मीरी पंडित का अंतिम संस्कार किया। खास बात यह रही कि इनमें से अधिकतर लोग मुस्लिम थे। त्रिचल गांव के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने 50 साल के तेज किशन का हिन्दू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार करवाया।

खबर के मुताबिक, किशन लंबे समय से बीमार था। जैसे ही उसकी मौत की खबर मिली उसके पड़ोसियों ने मस्जिद के लाउडस्पीकर से पूरे इलाके को इसकी सूचना दे दी। किशन के भाई जानकी नाथ पंडित ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, यही असली कश्मीर है। यही हमारी सभ्यता और भाईचारा है। हम भेदभाव और बांटने वाली राजनीति में भरोसा नहीं करते।

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वहीं किशन के पड़ोसी मोहम्मद यूसुफ ने कहा, किशन के अंतिम संस्कार की ज्यादातर रस्में मुस्लिमों ने पूरी की। यहां आए 99 फीसदी लोग मुस्लिम थे। चिता पर लेटाने और आग लगाने से लेकर लकड़ी काटने तक का काम मुस्लिमों ने किया है। खुद मैने भी चिता के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने की रस्म की।

देखिए यह वीडियो:

बता दें कि, पिछले साल दिसंबर 2016 में गुजरात के अहमदाबाद में सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल सामने आई थी।एक ब्रेन डेड मुस्लिम युवक के दिल से हिंदू युवक के सीने को धड़काया गया और हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद उस हिंदू युवक को एक नई ज़िंदगी दी गई। भावनगर में सड़क दुर्घटना में जांन गंवा चुके युवक आसिफ के दिल को अहमदाबाद सीम्स हॉस्पिटल लाया गया। यहां जामनगर के किसान अर्जुनभाई के शरीर में आसिफ के दिल को ट्रांसप्लांंट किया गया।

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वहीं दूसरी और अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना स्थित बसीरहाट में हिंसा के दौरान मुस्लिम समुदाय के कुछ हिंसक प्रदर्शनकारियों ने इलाके में रह रहे हिंदू समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया और उनके घरों और दुकानों में तोड़फोड़ कर काफी नुकसान पहुंचा दिए थे। जिससे आहत मोहम्मद नूर इस्लाम गाजी ने अन्य मुसलमानों को साथ लेकर अपने हिंदू पड़ोसियों की मदद को आगे आए थे।

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‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, इसके तहत गाजी ने अपने साथ कई मुसलमानों को इकट्ठा किए और हिंसा की भेंट चढ़े स्थानीय निवासी अजय पाल की पान बीड़ी की टुटी हुई दुकान के बाहर जमा हो गए। गाजी और अन्य मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पाल से बातचीत की और उससे फिर से अपनी पान बीड़ी की दुकान खोलने की गुजारिश की।

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