2002 के गुजरात दंगों की तस्वीर का इस्तेमाल कर बंगाल हिंसा को बढ़ावा दे रही है BJP, आरोपों के घेरे में नूपुर शर्मा और स्वप्नदास गुप्ता

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पश्चिम बंगाल के बशीरहाट में हिंसक घटनाओं के बाद अब भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस बीच वहां की घटनाओं पर अब सियासत पूरी तरीके से गरमाई हुई है। इस हिंसा की आग में अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता घी डालने का काम कर रहे हैं।

चुनावी लाभ लेने के लिए बीजेपी नेताओं ने अब फर्जी तस्वीरों के सहारे अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम कर रहे हैं। भोजपुरी फिल्म के एक सीन की फर्जी फोटो शेयर करके सांप्रदायिक हिंसा फैलाने के आरोप में बीजेपी नेता की गिरफ्तारी के बाद एक और बीजेपी नेत्री ने 2002 में हुए गुजरात दंगों की तस्वीरें शेयर कर हंगामा खड़ा कर दी है।

बीजेपी नेत्री नूपुर शर्मा ने शनिवार(8 जुलाई) को लोगों से दिल्ली की जंतर मंतर पर आने का आह्वान करते हुए ‘बंगाल को बचाने’ और ‘हिंदुओं को बचाने’ की गुजारिश की है। शर्मा ने लिखा, “बोलो, क्योंकि पहले ही बहुत देर हो चुकी है! आज शाम 5 बजे जंतर मंतर आइए। साथ ही उन्होंने #सेवबंगाल और #सेवहिंदू का हैशटैक लगाई हैं।

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हालांकि, बीजेपी नेत्री ने अपने ट्वीट में जिस तस्वीर का इस्तेमाल किया वह 2002 में हुए मुस्लिम विरोधी गुजरात दंगों की है, जिसमें 2000 से अधिक लोग मारे गए थे। उस वक्त नरेंद्र मोदी(वर्तमान में प्रधानमंत्री) गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

पूर्व में कई अखबारों और वेबसाइटों पर गुजरात दंगे की लेखों में यह तस्वीर सामने आ चुकी है। इसके अलावा प्रसिद्ध अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स में एलेन बैरी द्वारा लिखे गए एक लेख में इसी फोटो का इस्तेमाल किया गया है। जो 2 जून 2016 को प्रकाशित हुआ था।

इतना ही इसी तस्वीर को 16 अप्रैल 2014 को बीजेपी समर्थक हिंदी अखबार दैनिक जागरण ने भी इस्तेमाल किया था। जिसमें बताया गया था कि 2002 के दंगा पीड़ितों के पांच वकीलों को पेशागत कदाचार के आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात बार काउंसिल के अध्यक्ष अनिल केल्ला ने कहा कि वकीलों के स्पष्टीकरण से हम संतुष्ट हैं और उनके खिलाफ आगे कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है।

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अब शर्मा ने इसी तस्वीर को बंगाल दंगों से जोड़कर हिंसा को बढ़ाने का काम किया है। सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने के बाद तमाम यूजर्स ने ट्विटर से नूपुर शर्मा का अकाउंट बंद की अपील कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि बीजेपी नेत्री गुजरात दंगों की तस्वीर का इस्तेमाल कर बंगाल हिंसा के आग में घी डालने का काम कर रही हैं।

प्रसिद्ध संगीत निर्देशक विशाल डडलानी ने ट्वीट किया, “2002 गुजरात दंगे का फोटो पोस्ट कर बंगाल में सांप्रदायिक नफरत को बढ़ावा देने के लिए इनके खाते को क्यों ने बंद किया जाए?’

नूपुर शर्मा के अलावा बीजेपी के राज्यसभा के सांसद स्वपन दासगुप्ता भी बंगाल हिंसा को लेकर एक सभा को संबोधित कर रहे हैं जिसमें गुजरात दंगों की तस्वीरों का ही इस्तेमाल किया गया है। इस फर्जी तस्वीर को लेकर अब नूपुर शर्मा और स्वपन दासगुप्ता सवालों के घेरे में आ गए हैं।

बता दें कि अभी शनिवार (8 जुलाई) को ही कोलकाता पुलिस ने भोजपुरी फिल्म के एक सीन की फर्जी फोटो शेयर करके सांप्रदायिक हिंसा फैलाने के आरोप में एक शख्स को गिरफ्तार किया है। इस तस्वीर के चलते पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित 24 परगना में फैली हिंसा में एक शख्स की जान चली गई है।

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इसी फर्जी तस्वीर को हरियाणा की एक बीजेपी नेता ने अपने फेसबुक वॉल पर भोजपुरी फिल्म के एक सीन की तस्वीर शेयर करते हुए उसे बंगाल में भड़के सांप्रदायिक दंगे का बताया था। पुलिस ने बताया कि जिस तस्वीर को पश्चिम बंगाल को बताया जा रहा है, दरअसल वह हकीकत में 2014 में रिलीज हुई भोजपुरी फिल्म ‘औरत खिलौना नहीं’ का एक सीन है।

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