खुलासा: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का किसानों की मौत पर उपवास ‘पूर्व नियोजित’ था?

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मध्य प्रदेश के मंदसौर में उग्र हुए किसान आंदोलन में शांति कायम करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के दशहरा मैदान में शनिवार(10 जून) को अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे थे और रविवार(11 जून) को उन्होंने अपना उपवास तोड़ भी दिया। बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जूस पिलाकर उनका उपवास तुड़वाया। लेकिन एबीपी न्यूज़ ने इसका खुलासा किया है कि, कही मुख्यमंत्री का उपवास पहले से तो तय नही था।

photo- abp news

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि, मंदसौर फायरिंग में मारे गए किसानों के परिवारों की अपील पर उपवास खत्म किया गया साथ ही उन्होंने कहा था कि, किसानों ने कहा था कि मुख्यमंत्री हमारे बारे में सोचें और दोषियों को सजा जरुर दें। साथ ही शिवराज ने कहा था कि जब-जब राज्य में किसानों पर संकट आया, मैं मुख्यमंत्री आवास से निकलकर उनके बीच पहुंच गया। हम नया आयोग बनाएंगे जो फसलों की सही लागत तय करेगा। उस लागत के हिसाब से हम किसानों को सही कीमत दिलाएंगे, साथ ही उन्होंने कहा था कि मारे गए किसानों के परिजन मुझसे मिले और उपवास तोड़ने को कहा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था, ‘मैं अभिभूत हूं। कल जब मैंने वो दृश्य देखा, जिस परिवार के बच्चों की मृत्यु हई, वो परिवार वाले मेरे पास आए और उन्होंने द्रवित होकर कहा कि ठीक है चले गए हमारे बेटे तो इतना जरूर कर देना कि जो अपराधी हैं उनको सजा मिल जाए लेकिन तुम उपवास से उठ जाओ, तुम हमारे गांव आओ।’

बता दें कि, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपना उपवास मंदसौर से करीब 350 किलोमीटर दूर भोपाल के दशहरा मैदान में रखा था। लेकिन ये बात तोड़ी सी अटपटी नही लग रही है कि, आखिर कैसे जिन किसानों की मौत पुलिस की गोली से हुई, उनके परिवार कुछ घंटों में शिवराज का उपवास तुड़वाने मंदसौर से भोपाल पहुंच गए।

लेकिन एबीपी न्यूज़ ने इस ख़बर की पड़ताल करते हुए मंदसौर में उन परिवारों से बात की जिनके घर के लोग फायरिंग में मारे गए थे। फायरिंग में मारे गए पूनमचंद पाटीदार के परिवार से जैनेंद्र ने बातचीत में पूछा कि क्या वो वाकई शिवराज का उपवास तुड़वाने के लिए अपनी मर्जी से मंदसौर गए थे? मृतक बबलू के रिश्तेदार ने कहा कि उन्होंने ऐसा बनाया कि ये परिवारजन आए हैं हमारा उपवास तुड़वाने के लिए, बाकी ऐसा कुछ हुआ नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि हमने तो बोला नहीं, हम क्यों बोलेंगे, तुम बैठे रहो, 10 महीने बैठे रहो, साल भर बैठो।

ख़बर के मुताबिक, एबीपी न्यूज संवाददाता ने उन सभी परिवारों से बात की जो उपवास के दिन भोपाल गए थे और इन लोगों से बातचीत में जो सुनने को मिला वो चौंकाने वाला था। एबीपी न्यूज़ के मुताबिक, एक मृतक के रिश्तेदार ने कहा कि राधेश्यामजी ने बताया था.. उनके पीए ने.. मतलब उन्होंने बोला कि तुम किसी बात पर चर्चा मत करना। पैसे या नौकरी की ऐसी कोई बात नहीं करना सिर्फ ये कहना कि हम आपका उपवास तुड़वाने के लिए आए।

लेकिन इससे एक बात तो साफ होती है कि, मंदसौर फायरिंग में मारे गए किसानों के परिवारों के बयान सुनकर लगता है कि, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह उपवास कही पहले से सोची समझी चाल तो नही था या फिर इसे सुनकर आपको भी लग रहा होगा की कही शिवराज का उपवास पहले से तो फिक्स नही था।

6 किसानों की मौत

बता दें कि मध्य प्रदेश के मंदसौर में (6 जून) को किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में छह किसानों की मौत हो गई थी और कई अन्य किसान घायल हो गये थे। इसके बाद किसान भड़क गये और किसान आंदोलन समूचे मध्य प्रदेश में फैल गया तथा और हिंसक हो गया था।

शिवराज सरकार का ‘यू-टर्न’

वहीं, 8 जून को मध्य प्रदेश सरकार ने आखिरकार मान लिया कि मंदसौर में भड़के किसान आंदोलन में किसानों की मौत पुलिस की गोली से ही हुई थी। राज्य के गृहमंत्री ने स्वीकारा कि किसानों पर पुलिस ने ही गोली चलाई थी।
गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पांच किसानों की मौत पुलिस की गोलीबारी में हुई है। जांच में इसकी पुष्टि हुई है।

बता दें कि इससे पहले प्रदेश सरकार पुलिस फायरिंग से इनकार कर रही थी। भूपेंद्र सिंह समते राज्य सरकार के सभी अधिकारी अब तक यही कह रहे थे कि गोली अराजक तत्वों द्वारा चलाई गई थी। किसान लगातार इस दावे को खारिज कर रहे थे। मुख्यमंत्री के इस उपवास को कांग्रेस ने नौटंकी बताया था, कांग्रेस ने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हैं और सीएम उपवास की नौटंकी कर रहे हैं।

बता दें कि मध्यप्रदेश में किसानों ने 1 जून को शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कर्ज माफी और अपनी फसल के वाजिब दाम की मांग को लेकर किसानों ने हड़ताल शुरू कर दी। किसानों ने पश्चिमी मध्य प्रदेश में अपनी तरह के पहले आंदोलन की शुरूआत करते हुए अनाज, दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति रोक दी।

 

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