मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन: BJP नेता का विवादित बयान, कहा- ‘5 किसानों की मौत बड़ा मुद्दा नहीं है’

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मध्यप्रदेश में चल रहे किसान आंदोलन के दसवें दिन सोमवार(10 जून) को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल के दशहरा मैदान में ‘शांति बहाली के लिये’ अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठ गए। उन्होंने किसानों को यहां समस्या के समाधान के लिये आने का आहवान भी किया है। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे ‘नौटंकी’ बताया। वहीं, दूसरी ओर राज्य में किसानों का आंदोलन अभी भी जारी है।इस बीच भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने किसानों की मौत को लेकर विवादित बयान दिया है। एक न्यूज चैनल से बातचीत में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और मध्यप्रदेश इकाई के वरिष्ठ अधिकारी कैलाश विजयवर्गीय ने शनिवार(10 जून) को कहा कि पुलिस गोलीबारी में 5 किसानों की मौत कोई ‘बड़ा मुद्दा’ नहीं है।

टाइम्स नाउ ने बातचीत के दौरान हमेशा विवादास्पद बयान देने वाले बीजेपी नेता ने कहा कि, अधिकांश किसान संगठन मुख्यमंत्री और सरकार के साथ हैं, मैं अभी खुद संगठनों से मिलकर आया हूं। उन्होंने कहा कि किसानों ने मुख्यमंत्री जी की प्रशंसा की है और सरकार की नियत और नीतियों की प्रशंसा की है। यह सच है कि निचले स्तर पर किसानों को सरकारी योजनाओं से लाभ बहुत मुश्किल से मिलता है, इसे लेकर किसानों के अंदर नाराजगी है।”

रिपोर्टर ने आगे पूछा कि, ‘जब इतनी तारीफें हो रही हैं तो राज्य में इतने बड़े स्तर पर हिंसा क्यों हुई, इतनी तोड़फोड़ क्यों हुई? इस सवाल के जवाब में विजयवर्गीय ने कहा, “यह आप के लिए बड़ा लग रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश एक बहुत बड़ा राज्य है। उन्होंने कहा कि यदि 3-4 जिलों में घटना घट जाए तो यह कोई बड़ी बात नहीं है।’

रिपोर्टर ने बीच में बीजेपी नेता को रोकते हुए कहा कि सर 5 लोग मरे हैं तो क्या आप इसको बड़ा नहीं मानते हैं? इस पर विजयवर्गीय ने कहा कि, ‘मध्य प्रदेश में कितने जिले हैं आपको(रिपोर्टर) पता है? उन्होंने कहा कि यह एक जिले की घटना है और इसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार है, क्या इस घटना को लेकर आप पूरे राज्य को बदनाम करेंगे?’

6 किसानों की मौत

बता दें कि राज्य के मंदसौर में मंगलवार(6 जून) को किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में छह किसानों की मौत हो गई थी और कई अन्य किसान घायल हो गये थे। इसके बाद किसान भड़क गये और किसान आंदोलन समूचे मध्यप्रदेश में फैल गया तथा और हिंसक हो गया।

शिवराज सरकार का ‘यू-टर्न’

वहीं, गुरुवार(8 जून) को मध्य प्रदेश सरकार ने आखिरकार मान लिया कि मंदसौर में भड़के किसान आंदोलन में पांच लोगों की मौत पुलिस की गोली से ही हुई थी। राज्य के गृहमंत्री ने स्वीकारा कि किसानों पर पुलिस ने ही गोली चलाई थी।
गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पांच किसानों की मौत पुलिस की गोलीबारी में हुई है। जांच में इसकी पुष्टि हुई है।

बता दें कि इससे पहले इससे पहले पिछले दो दिनों से प्रदेश सरकार पुलिस फायरिंग से इनकार कर रही थी। भूपेंद्र सिंह समते राज्य सरकार के सभी अधिकारी अब तक यही कह रहे थे कि गोली अराजक तत्वों द्वारा चलाई गई थी। किसान लगातार इस दावे को खारिज कर रहे थे।

1 जून आंदोलन कर रहे हैं किसान

बता दें कि मध्यप्रदेश में किसानों ने गुरुवार(1 जून) को शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्ज माफी और अपनी फसल के वाजिब दाम की मांग को लेकर किसानों की हड़ताल अभी भी जारी है। किसानों ने पश्चिमी मध्य प्रदेश में अपनी तरह के पहले आंदोलन की शुरूआत करते हुए अनाज, दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति रोक दी है। सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ किसानों का आंदोलन 10 दिन तक चलेगा।

किसानों की प्रमुख मांगे

  • स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं।
  • किसानों को फसलों का उचित दाम मिले और समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए।
  • आलू, प्याज सहित सभी प्रकार की फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए।
  • आलू, प्याज की कीमत 1500 रुपये प्रति क्वंटल हो।
  • बिजली की बढ़ी हुई दरें सरकार जल्द से जल्द वापस लें।
  • आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।
  • मंडी शुल्क वापस लिया जाए।
  • फसलीय कृषि कर्ज की सीमा 10 लाख रुपए की जाए।
  • वसूली की समय-सीमा नवंबर और मई की जाए।
  • किसानों की कर्ज माफी हो।
  • मध्यप्रदेश में दूध उत्पादक किसानों को 52 रुपये प्रति लीटर दूध का भाव तय हो।

(देखें वीडियो)

 

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