‘युध्द की वकालत करने वाले न्यूज चैनल्स और भक्तों को तमाचे के लिए शुक्रिया प्रधानमंत्री जी’

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ऐसा लगता है अहम मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खामोंशी अब मोदी समर्थकों को भी पसंद नहीं आ रही है।

खासकर पाकिस्तान के मुद्दे पर ना सिर्फ मोदी के आलोचक बल्कि उनके चाहने वालों को भी ये बात गले नहीं उतर रही है कि कभी एक सिर के बदले दस सिर लाने का दावा करने वाले मोदी अब उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान के लोगों को गरीबी और कुपोषण के साथ लड़ाई करने की नसीहत दे रहे हैं।

एक ज़माना था जब ये जुमले डूब मरो,ओबामा,ओबामा,पाकिस्तान जाओं ना,पाकिस्तान को पाकिस्तान की भाषा में जवाब देना चाहिए मोदी के भाषण का एक अभिन्न अंग हुआ करते थे।

उनके इन्ही सब दावों ने उन्हे लाखों कट्टर समर्थक भी दिए, जिन्हे सोशल मीडिया की भाषा में भक्त कहा जाता है इन समर्थकों को उम्मीद थी कि  मोदी के शक्ल में भारत को एक ‘मजबूत नेता’ मिल गया।

लेकिन, जल्द ही उन लोगों को ये महसूस हो गया कि मोदी के चुनावी वादे और रैलियों के तेवर वास्तविकता से काफी दूर थे। जैसे जैसे ये चीज़े मोदी समर्थकों के सामने आती गई तो मोदी के सहयोगियों ने इसे चुनावी जुमले करार दिए या इसकी तुलना वास्तिकवता से दूर वादों से की।

लोगों का मानना है कि अपने शत्रु पड़ोसी देश पाकिस्तान पर मोदी ने यू टर्न ले रखा है बावजूद इसके कि मोदी के कट्टर समर्थकों ने हमेशा उम्मीद जगाए रखी कि उनका नेता 56 इंच के सीने के साथ एक दिन पाकिस्तान को सबक सिखाएगा।

शनिवार के भाषण से मोदी के समर्थकों को ये उम्मीद थी की उड़ी हमले पर मोदी को कागज़ी शेर बताने वाले आलोचकों को पीएम मुहतोड़ जवाब देंगे।

लेकिन, आज मोदी समर्थक भी निराश हैं।

शनिवार को जब पीएम मोदी ने उड़ी हमले पर पहली बार भाषण दिया और युध्द के लिए पाकिस्तान से पहल का आह्वान किया लेकिन यहां युध्द से उनका मतलब सैन्य कारर्वाई नहीं बल्कि गरीबी, कुपोषण और बेरोजगारी थी।

अगर किसी को ऊंची दुकान फीके पकवान मुहावरे को सही से समझना हो तो मोदी समर्थकों को पीएम की कोझिकोड रैली में समझने का अवसर मिला था।

कुछ लोगों ने मोदी के इस भाषण का निष्पक्षता से जबाव दिया है और कहा है मोदी को विदेश नीति की व्यावहारिकता समझ में आ रही है और झूठे 56 इंच सीने के तर्क से उन्हे बचना चाहिए था।

मोदी के समर्थकों में निराशा किस हद तक है इसका अंदाज़ा फेसबुक पर मोदी समर्थक फ्रस्टेटिड इंडियन यूजर के इस पोस्ट से लगाया जा सकता है।

उसने लिखा, ‘तो पीएम मोदी ने आज फिर वही किया जिस काम में वो माहिर हैं,एक और शानदार भाषण पाकिस्तान के लोगों को संबोधित करते हुए लेकिन लेकिन प्रिय प्रधानमंत्री जी, भारत के लोग कार्रवाई देखना चाहते हैं।’

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जैसी कि उम्मीद थी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मोदी के खिलाफ व्यंग्य की टिप्पणी के साथ बाढ़ आ गई है।

प्रतीक सिन्हा ने लिखा, ‘भक्तों भाषण कैसा लगा, एक सर के बदले 10 सर लाने वाले हैं क्या मोदी जी, बोया मोदी, निकला मनमोहन।’

सुब्रमण्यम स्वामी की पैरोडी अकांउट के यूजर ने लिखा, ” केरल के भाजपा मंच से उड़ी हमले के बारे में बोलते हुए पीएम मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री से ज्यादा कुछ भी नहीं लगे, नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के लोगों  को संबोधित करने का फैसला किया और उन्हे गरीबी के खिलाफ युध्द करने की नसीहत दी। युध्द की वकालत करने वाले न्यूज चैनल्स और भक्तों को तमाचे के लिए शुक्रिया प्रधानमंत्री जी

इमरान अली: मनमोहन सिंह अपने दो कार्यकाल के दौरान कभी पाकिस्तान नहीं गए, वो अपने इस सिध्दांत पर हमेशा कायम रहे कि आतंकवाद और वार्ता कभी साथ साथ नहीं चल सकती और हमारे मोदी जी हाहाहा..

आलोक जगधारी: अब ये अफवाह कौन फैला रहा है कि मोदी गिलगित और बाल्टिस्तान से चुनाव लड़ेंगे।

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