शिवराज सरकार ने 15 मुस्लिमों पर झूठे लगाए थे राजद्रोह का केस, पीड़ित बोले- जेल में ‘गद्दार’ कहकर मारा गया थप्पड़

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मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के कस्बे मोहद में चैंपियंस ट्रॉफी क्रिकेट के फाइनल में 18 जून को पाकिस्तान की जीत पर कथित तौर पर आतिशबाजी और जश्न मनाने के आरोप में शिवराज सरकार ने 15 लोगों पर देशद्रोह का केस दर्ज कर 20 जून को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज गया।

Image credit: Amnesty International India

हालांकि, मात्र दो दिन बाद 22 जून को सबूतों के अभाव में गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों पर लगे देशद्रोह का केस वापस लेना पड़ा। जिसके बाद सभी लोगों को 27 जून को अदालत से जमानत मिल गई। गौरतलब है कि 18 जून को लंदन में आईसीसी चैंपियंस ट्राफी के फाइनल मैच में पाकिस्तान ने भारत को 180 रन से हराया था।

करीब 10 दिनों तक जेल में रहने के बाद रिहा हुए इन लोगों ने मीडिया से अपना दर्ज साझा करते हुए आरोप लगाया कि उनसे जेल में पखाना और नाली साफ करवाया गया और कुछ कैदी उन्हें ‘गद्दार’ कहकर संबोधित करते थे। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अनीस बाबू मंसूरी ने अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि जब उन लोगों को जेल ले जाया गया तो वहां के करीब एक दर्जन पुराने कैदियों ने हर किसी को थप्पड़ मारा और उनके साथ गालीगलौज की।

25 वर्षीय मंसूरी ने HT को बताया कि पुलिस ने हिरासत में उनकी पिटाई भी की थी। पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई पिटाई के निशान दिखाते हुए मंसूरी ने अखबार को बताया, हम मुसलमान हैं तो हिन्दुस्तानी भी हैं। इतना ही नहीं, NDTV के मुताबिक, पुलिस ने जिस शिकायतकर्ता की शिकायत पर मामला दर्ज करने का दावा किया है वह खुद कह रहा है कि उसने ऐसी कोई शिकायत नहीं की। यहां तक कि वह उस दिन गांव में मौजूद भी नहीं था।

पुलिस ने इस मामले में सुभाष कोली को मुख्य शिकायतकर्ता बनाया है, लेकिन NDTV के साथ बातचीत में कोली ने कहा उन्हें जबरन गवाह बनाया गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पुलिस को सूचित नहीं किया था। उस दिन वह एक पड़ोसी की मदद करने के लिए थाने गया थे, जिसे नारे लगाने के आरोप में पुलिस ले गई थी।

उसने बताया कि वह थाने में था, इसलिए पुलिस ने उसे ही गवाह बना दिया। कोली ने कहा उस दिन नारे लगे, लेकिन ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगे। बता दें कि पुलिस ने आरोप लगाया था कि इन लोगों ने भारत के हारने के बाद जश्न मनाए थे और पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए थे।

हालांकि, जब पुलिस को कोई सबूत-गवाह नहीं मिला तो उसने 19 से 35 साल की आयु के सभी 15 लोगों पर से राजद्रोह (धारा 124-ए ) का केस हटाते हुए सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने (धारा 153-ए) का मामला दर्ज कर दिया।बुरहानपुर के पुलिस अधीक्षक आर आर एस परिहार ने बताया कि, हमने इन 15 लोगों के खिलाफ भादवि की धारा 124ए (देशद्रोह) का आरोप हटा दिया है और इसके स्थान पर भादंवि की धारा 153ए (सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडना) लगाई है।

 

 

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