रविवार (18 जून) को चैम्पियंस ट्रॉफ़ी में पाकिस्तान-भारत मैच में पाकिस्तान की जीत के बाद कई जगह से खबरें आईं थी की देश के लोगों ने पाक समर्थन में खुशियां मनाई। जिसके बाद मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के मोहाद गांव में कथित रूप से जश्न मनाने और पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने के आरोप में 15 लोगों पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था, लेकिन गुरुवार(22 जून) को पुलिस को सभी आरोपियों पर से राजद्रोह का मुकदमा को हटा लिया है।
photo- hindustantimesमीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत के बाद पुलिस एसपी आरआर एस परिहार ने कहा कि आरंभिक जांच के बाद हमें लगा कि धारा 124-ए (राजद्रोह) के बजाय 153-ए (सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने) ज्यादा उचित होगी। इसलिए भले ही उन लोगों से राजद्रोह का मामला हट गया हो लेकिन सांप्रदायिकता के तहत माहौल खराब करने का मामला है जिस कारण वो अभी भी जेल में हैं।
हिन्दुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, सूत्रों के हवाले से कहा है कि पुलिस ने यह कदम मानवाधिकार संगठनों द्वारा आरोपितों पर राजद्रोह का मामला दर्ज करने को लेकर आपत्ति जताने के बाद उठाया है। इन संगठनों ने सवाल उठाया था कि किसी क्रिकेट मैच में दूसरी टीम के लिए जश्न मनाने पर राजद्रोह का मामला कैसे दर्ज किया जा सकता है।
ख़बरों के मुताबिक, बीते मंगलवार को आरोपितों के परिजनों ने अपनी तकलीफ जाहिर करते हुए कहा था कि राजद्रोह का मामला उनकी जिंदगी बर्बाद कर देगा। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया था कि मुसलमान होने की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
ख़बरों के मुताबिक, वहीं कुछ गांववालों का आरोप है कि भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट मैच के बाद पुलिस दो-तीन दिन गांव में घूमती रही और जिसे मन उसे उठा लिया। पुलिस ने जिन 15 लोगों पर ये मामला दर्ज किया है उनमें से किसी का भी किसी तरह को कोई आपराधिक अतीत नहीं रहा है।
जिन लोगों पर मामला दर्ज किया गया है उनमें से दो को छोड़कर बाकी अनपढ़ हैं और दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हैं इतना ही नहीं कुछ के घर में न तो मोबाइल है और न ही टीवी। गौरतलब है कि रविवार(18 जून) को लंदन में आईसीसी चैंम्पियन्स ट्राफी के फायनल मैच में पाकिस्तान ने भारत को 180 रन से हराया था।