नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (एनडीए) की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति होंगे। कोविंद ने जीत का आंकड़ा पार कर लिया है। इस चुनाव में रामनाथ कोविंद को 65.65 प्रतिशत वोट मिला है, वही विपक्ष की ओर से उम्मीदवार मीरा कुमार को 34.35 प्रतिशत वोट मिले। अगर वोट की बात करे तो रामनाथ कोविंद को 7,02,044 वोट और मीरा कुमार को 3,67,314 वोट मिले हैं। राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान सोमवार को हुआ था।
रामनाथ कोविंद को 2930 वोट मिली जिसकी वैल्यू 7,02,044 है, जबकि मीरा कुमार को 1,844 वोट मिले जिसकी वैल्यू 3,67,314.77 है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने रामनाथ कोविंद को जीत की बधाई दी है।
8 राउंड में हुई वोटों की गिनती में कोविंद शुरू से अंत तक बड़े अंतर से बढ़त बनाए रहे। पहले राष्ट्रपति भवन की मतदान पेटी को खोला गया फिर ऐल्फाबेट के आधार पर राज्यों की मतदान पेटियों के मतों की गणना की गई। सभी वोटों की गिनती 4 अलग मेजों पर की गई और 8 दौर में गिनती पूरी हुई।
बता दें कि इस बार करीब 99 प्रतिशत मतदान हुआ था। संसद भवन के एक मतदान सहित विभिन्न राज्यों में 32 मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे। चनाव में कुल 4,896 लोग (4,120 विधायक और 776 निवाचर्ति सांसद) वोट देने के लिए पात्र थे। विधान परिषद वाले राज्यों के एमएलसी इलेक्टोरल कॉलेज का हिस्सा नहीं हैं।
विधायकों के मतों का मूल्य राज्य की जनसंख्या पर निर्भर करता है, जिस राज्य से वे विधायक नाता रखते हैं, जबकि सभी सांसदों के मतों का मूल्य एक समान 708 है। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की तुलना में अधिकतर मत बिहार के पूर्व राज्यपाल और सत्तारुढ़ गठबंधन राजग रामनाथ कोविंद के पक्ष में डाले गए थे।
कौन हैं रामनाथ कोविंद?
अपने लंबे राजनीतिक जीवन में शुरू से ही अनुसूचित जातियों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों तथा महिलाओं की लड़ाई लड़ने वाले कोविंद राष्ट्रपति चुनाव से पहले बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे। बीजेपी दलित मोर्चा तथा अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष रह चुके कोविंद बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर भी सेवाएं दे चुके हैं। कोविंद बेहद कामयाब वकील भी रहे हैं।
उन्होंने वर्ष 1977 से 1979 तक दिल्ली हाईकोर्ट में, जबकि 1980 से 1993 तक सुप्रीम कोर्ट में वकालत की। सामाजिक जीवन में सक्रियता के मद्देनजर वह अप्रैल, 1994 में राज्यसभा के लिए चुने गए और लगातार दो बार मार्च 2006 तक उच्च सदन के सदस्य रहे।
कोविंद उत्तर प्रदेश से पहले राष्ट्रपति होंगे। कानपुर देहात के घाटमपुर स्थित परौंख गांव में 1 अक्टूबर, 1945 को जन्मे कोविंद राज्यसभा सदस्य के रूप में अनेक संसदीय समितियों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। खासकर अनुसचित जाति-जनजाति कल्याण संबंधी समिति, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा कानून एवं न्याय संबंधी संसदीय समितियों में वह सदस्य रहे। कोविंद ने संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया है और अक्टूबर, 2002 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था।