राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के कई अन्य नेताओं ने बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के ताजा बयान को लेकर सोमवार को उन पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के आंतरिक मुद्दे का जिक्र मीडिया में करने से कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत होती हैं।
दरअसल, कपिल सिब्बल ने अंग्रेजी दैनिक अख़बार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि ऐसा लगता है कि पार्टी नेतृत्व ने शायद हर चुनाव में पराजय को ही अपनी नियति मान लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार ही नहीं, उपचुनावों के नतीजों से भी ऐसा लग रहा है कि देश के लोग कांग्रेस पार्टी को प्रभावी विकल्प नहीं मान रहे हैं। बता दें कि, कार्ति चिदंबरम ने भी हार पर चिंतन की बात कही है। जवाब में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सिब्बल को नसीहत दी है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी ने भी सिब्बल पर कटाक्ष किया है।
बता दें कि, सिब्बल पार्टी के उन 23 नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने अगस्त में पार्टी नेतृत्व को विरोध पत्र लिखा था। इसको लेकर पार्टी के भीतर काफी घमासान मचा था। हालांकि, इसके बावजूद कांग्रेस में कोई बदलाव नहीं दिखा, बल्कि पत्र लिखने वाले नेताओं का कद कम कर दिया गया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने सिलसिलेवार ट्वीट कर सिब्बल की आलोचना की है। गहलोत ने ट्वीट किया, ‘’कपिल सिब्बल द्वारा पार्टी के आंतरिक मुद्दे का जिक्र मीडिया में करने की कोई जरूरत नहीं थी, इससे देश भर में पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत होती हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस ने 1969, 1977, 1989 और उसके बाद 1996 में अनेक संकट देखे … लेकिन अपनी विचारधारा, कार्यक्रमों व नीतियों और पार्टी नेतृत्व में मजबूत विश्वास के चलते हर बार हम और अधिक मजबूत होकर निकले हैं।’’
Congress has seen various crises including 1969, 1977, 1989 and later in the 1996 – but every-time we came out stronger due to our ideology, programs, policies and firm belief in party leadership.
2/— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) November 16, 2020
राजस्थान के मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया, ‘‘हम हर संकट के बाद बेहतर हुए और 2004 में सोनिया गांधी के नेतृत्व में संप्रग सरकार भी बनी। इस बार भी हम संकट से निकल आएंगे।’ कांग्रेस महासचिव तारिक अनवर ने संवाददाताओं से कहा कि बिहार चुनाव में हार के लिए पार्टी केंद्रीय नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है क्योंकि इसकी जिम्मेदारी प्रदेश इकाई की है।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (डीपीसीसी) के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने सिब्बल पर कटाक्ष किया है कि लड़ना है तो मोदी और केजरीवाल से लड़िए। उन्होंने ट्वीट किया, ‘सिब्बल जी, दिल्ली देश की राजधानी है। आप यहां से सांसद रहे, मंत्री रहे। पिछले कुछ समय से आप दिल्ली की राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। आइए मिलकर दिल्ली में मोदी और केजरीवाल से लड़ते हैं। आप वरिष्ठ नेता हैं। डीपीसीसी में आप किसी भी समय आएं, हमें दिल्ली की लड़ाई के लिए गाइड करें। मैं चाहूंगा कि आप रोज अपना कुछ समय डीपीसीसी में बिताएं। आप जिस भी विभाग में, जिस भी पद पर काम करना चाहें, ये हमारा सौभाग्य होगा।’
आप सीनियर नेता हैं. DPCC में आप कभी भी समय आयें, हमें दिल्ली की लड़ाई के लिए गाइड करें.
मैं चाहूँगा कि आप रोज अपना कुछ समय DPCC में बिताएं. आप जिस भी विभाग में, जिस भी पोस्ट पर काम करना चाहें, ये हमारा सौभाग्य होगा. (2/2)@KapilSibal
— Anil Chaudhary (@Ch_AnilKumarINC) November 16, 2020
भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने सिब्बल पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया, ‘‘जब समय अच्छा था तो आप संगठन को ‘ज्ञान’ देने वाले मंत्री थे, लेकिन तब भी राहुल गांधी जी न प्रधानमंत्री बने और न मंत्री। उस दौरान भी वह युवा कांग्रेस जैसे कांग्रेस के फ्रंटल संगठनों को मजबूत कर रहे थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज जब वक्त अनुकूल नही, तब भी राहुल जी दिन रात संगठन की मजबूती के लिए प्रयासरत है। जो पहले मंत्री थे, वे आखिरी बार कब सत्ता के खिलाफ ‘लाठियां’ खाने सड़कों पर कार्यकर्ताओं के साथ उतरे थे? आखिरी बार कब आपने खुलकर नरेंद्र मोदी, अमित शाह और भाजपा की मुखालफत की थी?’’
– आखिरी बार कब सत्ता के खिलाफ 'लाठियां' खाने आप सड़कों पर कार्यकर्ताओं के साथ उतरे थे ?
– आखिरी बार कब आपने खुलकर नरेंद्र मोदी, अमित शाह और भाजपा की मुखालफत की थी ?
सच तो यही है कि, जरूरी नही भाजपा की मदद करने भाजपा में शामिल हुए जाए, हमारे पास मीडिया और संगठन में कई उदहारण है
— Srinivas B V (@srinivasiyc) November 16, 2020
कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राजद के सामने कांग्रेस को ‘नतमस्तक’ कराने वाले पार्टी के सभी पदाधिकारियों को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘बिहार चुनाव में बुरी तरह “हारने” के बाद उन सभी पदाधिकारीयों को नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए जिन्होंने राजद के सामने कांग्रेस को “नतमस्तक” कराने की ग़लती की।’’
बिहार चुनाव में बुरी तरह “हारने”
के बाद उन सभी पदाधिकारीयों को नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से “इस्तीफ़ा” दे देना चाहिये जिन्होंने “RJD”
के सामने “कांग्रेस” को “नतमस्तक” कराने की ग़लती की.— Acharya Pramod (@AcharyaPramodk) November 16, 2020
उधर, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सिब्बल के बयान से परोक्ष रूप से सहमति जताते हुए कहा कि यह कांग्रेस के लिए आत्मविश्लेषण, चिंतन और विचार-विमर्श करने का समय है।
It’s time we introspect, ideate, consult & act @INCIndia https://t.co/Rz4mtA6eu1
— Karti P Chidambaram (@KartiPC) November 16, 2020
उल्लेखनीय है कि, बिहार के हालिया विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की घटक कांग्रेस सिर्फ 19 सीटों पर सिमट गई, जबकि उसने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन के सत्ता से दूर रह जाने का एक प्रमुख कारण कांग्रेस के इस निराशाजनक प्रदर्शन को भी माना जा रहा है। (इंपुट: भाषा के साथ)