बिहार में आए दिन अपराध की सनसनीखेज घटनाओं ने ये सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नीतीश-मोदी सरकार बनने के बाद बिहार में फिर से जंगलराज लौट आया है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि इन दिनों बिहार में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद है कि वो कहीं भी वारदात को अंजाम देने से नहीं डरते हैं। जिसका ताजा मामला एक बार फिर से देखने को मिला है।

बिहार के मधुबनी जिले के पंडौल थाना अंतर्गत सरिसब पाही बाजार में रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात अपराधियों ने पत्रकार प्रदीप मंडल की गोली मारकर हत्या कर दी। प्रदीप मंडल एक राष्ट्रीय हिंदी दैनिक अखबार के लिए काम करते थे। पंडौल थाना अध्यक्ष अनुज कुमार ने बताया कि मृतक प्रदीप मंडल एक राष्ट्रीय हिंदी दैनिक अखबार में स्ट्रिंगर के रूप में काम कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि प्रदीप के शव का पोस्टमार्टम जिला सदर अस्पताल में कराया गया है। प्रथम दृष्टया यह पुरानी दुश्मनी का मामला लग रहा है। अनुज ने बताया कि प्रदीप पर गोलीबारी कर मोटरसाइकिल पर सवार होकर फरार हुए दोनों अपराधियों- सुशील साह और अशोक कामत- की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। दोनों का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।
प्रदीप मंडल दैनिक जागरण के लिए काम करते थे। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, बताया जा रहा है कि घटना का कारण शराब के अवैध धंधेबाजों के खिलाफ खबरें लिखना है। पत्रकार की खबरों के कारण जेल गए शराब कारोबारियों ने जमानत पर छूटने के बाद उन्हें गोली मार दी।
हालांकि, पुलिस अभी तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है। गौरतलब है कि इससे पहले भी बिहार में कई पत्रकारों पर जानलेवा हमले की खबरें आती रही हैं।
बिहार के मधुबनी के पत्रकार प्रदीप मंडल को गोली मारी गई। वे दैनिक जागरण के लिए काम करते हैं। हमला सरसोंपाही में हुआ। मंडल दरभंगा के अस्पताल में ICU में भर्ती हैं। हालत गंभीर है। बताया जाता है कि शराबबंदी वाले बिहार में सक्रिय शराबमाफ़िया के खिलाफ लिखा था।
ये है बिहार में जंगलराज! pic.twitter.com/sDomxlGTJq
— Umashankar Singh (@umashankarsingh) July 29, 2019
बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राजद ने पत्रकार की हत्या की कड़ी निंदा करते हुए अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। राजद विधायक सह प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का इससे बड़ा नमूना और कोई नहीं हो सकता। लोकतंत्र के प्रहरी अपराधियों के गोली के शिकार होंगे। लोकतंत्र कहीं न कहीं खतरे में दिखेगा। पत्रकार समाज के दर्पण हैं। इन्हें सुरक्षित रखना शासन की पहली प्राथमिकता है। शासन अविलंब दोषियों को गिरफ्तार करे। (इंपुट: भाषा के साथ)