कलेक्टर के बाद BJP विधायक ने अपने बेटे का सरकारी स्कूल में करवाया एडमिशन

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आपने अक्सर देखा और सुना होगा कि, बड़े और मध्यवर्गीय परिवार के लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने से परहेज करते हैं। यही नहीं सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की योग्यता और अनुशासनहीनता की खबरे अक्सर सुर्ख़ियों में रहती है। लोग प्राईवेट स्कूलों को ज्यादा तवज्जो देते है, लोगों का मानना होता है कि सरकारी स्कूलों मेें पढ़ाई का स्तर सही नहीं होता है। ऐसे में छत्तीसगढ़ से एक ऐसा मामला सामने आया है जो मिसाल के तौर पर पेश किया जा सकता है।

फोटो- patrika

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में भाजपा के एक विधायक ने अपने बेटे का दाखिला सरकारी स्कूल में कराया है। पाथलगांव से विधायक और भाजपा के संसदीय सचिव शिवशंकर पैकरा ने अपने बेटे का नामांकन जसपुर जिले के पाथलगांव प्रखंड के बनगांव बी स्थित शासकीय प्राथमिक शाला की पहली कक्षा में शनिवार(9 जुलाई) को कराया है।ख़बरों के मुताबिक विधायक ने बताया कि इससे पहले भी उनकी दो बेटियां सरकारी स्कूल में पढ़ रही हैं।

बता दें कि, इससे पहले शिक्षा के मामले में बेहद संवेदनशील माने जाने वाले छत्तीसगढ के बलरामपुर जिले के कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने अपनी बच्ची का दाखिला जिले के ही सरकारी स्कूल में कराया था, इतना ही नहीं इससे पहले उन्होंने अपनी बेटी को 9 माह तक आंगनबाड़ी में पढ़ाया था।

इस बारें में अवनीश कुमार ने कहा था कि यह एक खबर हो सकती है, लेकिन मेरे लिए तो सिर्फ एक कर्तव्य है। इस पहल से हो सकता है लोग सरकारी स्कूलों की शिक्षा से जुड़ें। साथ ही उन्होंने कहा कि, इससे पहले उन्होंने अपनी बच्ची को एक साल तक आंगनबाड़ी में पढ़ने के लिए भेजा था।

PHOTO- ABP NEWS

गौरतलब है कि, छत्तीसगढ़ में कलेक्टर अवनीश कुमार शरण के बाद विधायक का उठाया गया यह कदम एक सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर उठ रही उंगलियां को थमा सकती है। एक तरप से देखा जाएं तो इस अधिकारी और भाजपा नेता ने पीएम मोदी के वीआईपी कल्चर को खत्म करने की मुहिम को बल दिया है। साथ ही दोनों के इस मजबूत इरादों से प्रदेश के अन्य नौकरशाहों के बीच एक बडा संदेश दिया है।

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