मानहानि मामले में निचली अदालत की ओर से BJP सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के खिलाफ जारी समन पर दिल्ली हाई कोर्ट ने लगाई रोक; तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दायर किया था मामला

0

दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के खिलाफ आपराधिक मानहानि से जुड़े एक मामले में निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर सोमवार को रोक लगा दी। मानहानि मामला दिल्ली के भाजपा प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा द्वारा दायर किया गया है।

सुब्रमण्यम स्वामी

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने मामले में छह अप्रैल के लिए जारी समन को चुनौती देने वाली स्वामी की याचिका पर बग्गा को नोटिस जारी किया। उन्होंने कहा कि आपराधिक मानहानि के मामले में कार्यवाही पर सुनवाई की अगली तारीख तक रोक लगाई जाती है। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई छह सितंबर को करेगा।

22 मार्च को अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र सिंह ने मानहानि मामले में राज्यसभा सदस्य को आरोपी के रूप में तलब करने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि स्वामी के खिलाफ कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार हैं।

बग्गा ने अपनी शिकायत में दावा किया था कि पिछले साल सितंबर में स्वामी ने एक ट्वीट में झूठा आरोप लगाया था कि भाजपा में शामिल होने से पहले उन्हें (बग्गा) नयी दिल्ली स्थित मंदिर मार्ग पुलिस थाने में छोटे-मोटे अपराधों के लिए कई बार जेल भेजा गया था।

स्वामी की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने तर्क दिया कि सुनवाई अदालत का आदेश त्रुटिपूर्ण है, क्योंकि उनके ट्वीट का गलत मतलब निकाला गया था। सिंह ने कहा कि सार्वजनिक मंच पर यह दिखाने के लिए पर्याप्त सामग्री है कि स्वामी द्वारा ट्वीट में लगाए गए शिकायतकर्ता को जेल होने के आरोप सही थे।

निचली अदालत के समक्ष अपनी गवाही में बग्गा ने दलील दी थी कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं और इनका मकसद उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना है।

निचली अदालत ने कहा था, “यहां तक कि मंदिर मार्ग पुलिस थाने के सब-इंस्पेक्टर संदीप कुमार ने भी शिकायतकर्ता के बयान की पुष्टि की है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि स्वामी ने बयान की सत्यता की पुष्टि किए बिना ये आरोप लगाए।”

शिकायत में लगाए गए आरोपों, गवाहों की गवाही और उनके द्वारा रिकॉर्ड पर लाई गई सामग्री के मद्देनजर निचली अदालत ने कहा था कि वह ‘प्रथम दृष्टया’ इस बात को लेकर आश्वस्त थी कि स्वामी को आईपीसी की धारा 500 (मानहानि) के तहत दंडनीय अपराध के आरोपी के रूप में तलब करने के लिए पर्याप्त आधार हैं।

बता दें कि, भाजपा नेताओं स्वामी और बग्गा के बीच एक-दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप के साथ एक ट्विटर युद्ध चला था। दोनों नेताओं के समर्थक भी अपने-अपने नेताओं का समर्थन हासिल कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कमेंट करते रहे हैं। (इंपुट: भाषा और IANS के साथ)

[Please join our Telegram group to stay up to date about news items published by Janta Ka Reporter]

Previous articleलखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ 152.95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी कर सोशल मीडिया पर छाए उमरान मलिक
Next articleBoard Exams 2022: अप्रैल में होगी CBSE टर्म 2 कक्षा 10वीं, 12वीं और CISCE की परीक्षाएं, अधिक जानकारी के लिए छात्र cbse.gov.in को करें फॉलों; जानें अन्य राज्यों पर अपडेट