सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार(7 नवंबर) को केंद्र सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह कार्रवाई पोलावरम मामले को लेकर की है, जिसमें उसे सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पोलावरम बांध के लिए हुए अन्तर्राज्यीय समझौते में अविभाजित मध्यप्रदेश(अब छत्तीसगढ़) अविभाजित आन्ध्रप्रदेश (अब तेलगाना सीमांध्र) व ओडिशा राज्य शामिल है। इस परियोजना के जरिए इन राज्यों में सिंचाई, बिजली पैदा करने के अलावा कृष्णा कछार में जल व्यपवर्तन का काम पूरा करना था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पोलावरम बांध के लिए हुए अन्तर्राज्यीय समझौते में अविभाजित मध्यप्रदेश(अब छत्तीसगढ़) अविभाजित आन्ध्रप्रदेश (तेलगाना सीमांध्र) व ओडिशा राज्य शामिल है। इस परियोजना के जरिए इन राज्यों में बिजली पैदा करने व सिंचाई का काम होना था।
ख़बरों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के तहत दोरला नाम का आदिवासी समुदाय बुरी तरह प्रभावित होगा। आशंका है कि इस बांध के कारण सुकमा जिले के कोंटा सहित 18 गांव डूब जाएंगे। पोलावरम बांध के निर्माण का काम सालों से चल रहा है, जिसकी ऊंचाई कम करने के लिए कई बार सरकार से मांग की जा चुकी है।
Polavaram case: Supreme Court imposes a fine of Rs 25,000 on central government after not getting their reply in the case.
— ANI (@ANI) November 7, 2017
गौरतलब है कि, पोलावरम अन्तर्राज्यीय परियोजना के लिए समझौते पर दस्तखत 7 अगस्त 1978 को अविभाजित मध्यप्रदेश की जनता पार्टी की सरकार ने किया था। तब मुख्यमंत्री वीरेन्द्र कुमार सकलेचा थे, इसके बाद संशोधित समझौता 2 अप्रैल 1980 को किया गया।