यूपी: 17.5 लाख रुपए की सरकारी मदद को ठुकरा कर गांव वालों ने अपने पैसों से बनाए शौचालय

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केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण अभियान स्वच्छ भारत के तहत देशभर के गांवों में स्वच्छता को देखते हुए गांव के अधिकतर लोगों ने अपने घर में टॉयलेट बनवाएं और देश के कई हिस्सों में यह कार्य अभी भी जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन का सपना कितना असर दार है इसका अंदाजा आप इस ख़बर से लगा सकते है। लेकिन यूपी का एक गांव ऐसा भी है जहां के लोग बिना किसी सरकारी मदद के अपना काम कर नई मिसालें कायम कर रहे हैं।

टॉयलेट
प्रतिकात्मक फोटो : The Indian Express

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के मुबारकपुर काला गांव के लोगों ने रमजान के पाक महीने में गांववालों ने प्रशासन से मिल रही मदद को ठुकरा कर अपने दम पर गांव को ‘खुले में शौच से मुक्ति’ दिलाई है। खबरों के मुताबिक बिजनौर के इस गांव ने सरकार से मिल रहे 17.5 लाख रुपए की सरकारी मदद लेने से भी इंकार कर दिया और फिर बाद में पैसे इकठ्ठा कर शौचालय बनवाए हैं।

इंस्पेक्शन के बाद मुबारकपुर काला गांव को ‘खुले में शौच से मुक्त’ घोषित कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 3,500 लोगों की जनसंख्या वाले इस गांव में सिर्फ 146 घरों में शौचालय थे और यह गांव मुस्लिम बहुल है। ज्यादातर लोग खुले में ही शौच के लिए जाते थे लेकिन अब इस गांव की सूरत बदल चुकी है।

वहीं गांव वालों का कहना है कि ‘यह रमजान का महीना है और अच्छे कामों के लिए मदद नहीं ली जाती। वहीं खबर के मुताबिक सीडीओ ने इस मौके पर खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि यह राज्य का पहला गांव होगा जिसने पैसे लेने से इंकार किया और खुद शौचालय बनवाने का काम किया। गौरतलब है कि इससे पहले 11 मई को ख़बर आई थी कि, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में दो महिलाओं ने थाने पहुंचकर अपने शौचालय चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई थी।

पेंड्रा थाना के प्रभारी इशहाक खलको ने बताया था कि पेंड्रा विकासखंड के अमरपुर गांव की दो महिलाएं, बेला बाई और उसकी बेटी चंदा बाई ने वर्ष 2015-16 में अपने घर में शौचालय निर्माण के लिए आवेदन दिया था। बेला और चंदा गरीब परिवार की हैं तथा दोनों विधवा हैं, दोनों मां-बेटी एक ही घर के दो अलग-अलग हिस्सों में रहती हैं।

 

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