टीआरपी घोटाला मामला: हंसा रिसर्च ग्रुप के दो और पूर्व कर्मचारियों को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने किया गिरफ्तार

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मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने फर्जी टेलीविन रेटिंग प्वाइंट्स (टीआरपी) रैकेट के सिलसिले में मंगलवार को हंसा रिसर्च एजेंसी के दो और पूर्व कर्मचारियों को गिरफ्तार किया। इस तरह, फर्जी TRP घोटाला मामले में अब तक आठ लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

मुंबई पुलिस
फाइल फोटो

अधिकारी ने बताया कि, रामजी वर्मा (41) और दिनेश विश्वकर्मा (37) ने कुछ सालों के लिए हंसा एजेंसी में काम किया था। अधिकारी के अनुसार वर्मा को वर्ली से गिरफ्तार किया गया जबकि विश्वकर्मा को मुम्बई हवाईअड्डे से शाम को गिरफ्तार किया गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान उनका नाम सामने आया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, इस मामले की छानबीन की जा रही है और इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती है।

बता दें कि, इस मामले में बीते सप्ताह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से विनय त्रिपाठी नाम के हंसा के पूर्व कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, मुंबई पुलिस कमिश्वर परमबीर सिंह ने मीडिया से बातचीत में दावा किया है कि मजिस्ट्रेट के सामने चार लोगों ने बयान देकर खास चैनल देखने के लिए पैसे लेने की बात स्वीकार की है।

यह कथित फर्जी टीआरपी घोटाला तब सामने आया जब रेटिंग एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने हंसा रिसर्च ग्रुप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई कि कुछ चैनल विज्ञापनदाताओं को आकर्षित करने के लिए टीआरपी अंक के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। आरोपी है कि दर्शक संबंधी आंकड़े के संग्रहण के लिए जिन परिवारों में मीटर लगाये गये थे और उनमें से कुछ को कुछ खास चैनल देखने के लिए रिश्वत दी जाती थी।

गौरतलब है कि, मुंबई पुलिस ने पिछले हफ्ते टीआरपी घोटाले का दावा किया था। मुंबई के पुलिस कमिश्‍नर परमबीर सिंह ने बीते दिनों एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में इस फर्जीवाड़े की जानकारी दी थी। उन्‍होंने कहा था कि इसमें रिपब्लिक टीवी समेत कुछ चैनल्‍स शामिल हैं। (इंपुट: भाषा के साथ)

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