शशि थरूर बोले- कांग्रेस को दिशाहीन होने की धारणा खत्म करने के लिए अवश्य ही फुल-टाइम अध्यक्ष चुनना चाहिए

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पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल की तिरुअनंतपुरम सीट से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने रविवार (9 अगस्त) को कहा कि पार्टी के लक्ष्यहीन और दिशाहीन होने की लोगों में बढ़ती धारणा को खत्म करने के लिए इसे एक पूर्णकालिक (फुल-टाइम) अध्यक्ष ढूंढ़ने की प्रक्रिया अवश्य ही तेज करना चाहिए।

शशि थरूर

कांग्रेस के लोकसभा सदस्य ने यह भी कहा कि उन्हें निश्चित रूप से से ऐसा लगता है कि पार्टी का एक बार फिर से नेतृत्व करने के लिए राहुल गांधी के पास ‘‘साहस, क्षमता और योग्यता’’ है, लेकिन यदि वह ऐसा करना नहीं चाहते हैं तो पार्टी को एक नया अध्यक्ष चुनने की दिशा में अवश्य ही आगे बढ़ना चाहिए। थरूर ने यह बयान ऐसे वक्‍त में दिया है जब सोनिया गांधी अंतरिम अध्‍यक्ष के रूप में एक साल का कार्यकाल पूरा करने वाली हैं। उन्‍हें पिछले साल 10 अगस्‍त को राहुल गांधी के इस्‍तीफे के बाद, मजबूरी में कमान सौंपी गई थी।

कांग्रेस सांसद ने समाचार एजेंसी पीटीआई (भाषा) से एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मेरा निश्चित तौर पर मानना है कि हमें अपने नेतृत्व के आगे बढ़ने के बारे में स्पष्ट होना चाहिए। मैंने पिछले साल अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर सोनिया जी की नियुक्ति का स्वागत किया था, लेकिन मेरा मानना है कि उनसे अनश्चितकाल तक इस जिम्मेदारी को उठाने की उम्मीद करना उचित नहीं होगा।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘हमें लोगों में बढ़ती और उपेक्षा करने वाली मीडिया द्वारा तूल दी जा रही यह धारणा भी खत्म करनी होगी कि कांग्रेस लक्ष्यहीन और दिशाहीन है, विश्वसनीय राष्ट्रीय विपक्ष की भूमिका निभा पाने में अक्षम है।’’

थरूर ने कहा कि एक पूर्णकालिक अध्यक्ष तलाशने की प्रक्रिया में तेजी लाकर कांग्रेस द्वारा फौरन इस मुद्दे का समाधान करने की जरूरत है। इसे एक भागीदारीपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से किया जाए जो विजेता उम्मीदवार को वैध अधिकार एवं विश्वसनीयता प्रदान करे, जो पार्टी में सांगठनिक एवं संरचनागत स्तर पर नई जान फूंकने के लिए बहुत जरूरी है। पार्टी अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी की वापसी की कांग्रेस में बढ़ती मांग और क्या उनका फिर से कमान संभालना सर्वश्रेष्ठ संभावित परिदृश्य होगा, इस बारे में पूछे जाने पर थरूर ने कहा , ‘‘बेशक, यदि राहुल गांधी फिर से नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं तो उन्हें अपना इस्तीफा वापस लेना होगा। वह दिसंबर 2022 तक सेवा देने के लिए चुने गए थे और उन्हें फिर से बागडोर थामनी होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन यदि वह (राहुल) ऐसा नहीं करते हैं तो हमें आगे बढ़ना होगा। मेरा यह निजी विचार है, जो आप जानते हैं कि मैं कुछ समय से इसकी हिमायत करता आ रहा हूं, यह कि कांग्रेस कार्यकारी समिति और अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराए जाने से निश्चित रूप से पार्टी के हित में कई परिणाम आएंगे।’’ केरल के तिरूवनंतपुरम से सांसद ने कहा एक भागीदारीपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया भावी नेतृत्व की विश्वसनीयता और वैधता को मजबूती प्रदान करेगी, जो एक महत्वपूर्ण चीज होगी क्योंकि वह पार्टी में नई ऊर्जा का संचार करने के साथ सांगठनिक चुनौतियों से उत्साहपूर्ण तरीके से निपटेगी।

थरूर ने कहा कि व्यापक तर्क किसी व्यक्ति विशेष के बारे में नहीं है, बल्कि एक प्रक्रिया या प्रणाली की हिमायत करने के बारे में है, जिसके जरिए कांग्रेस नेतृत्व के मौजूदा मुद्दे का हल कर सकती है और फिर पार्टी में नई जान फूंक सकती है तथा राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी में नयी ऊर्जा का संचार कर सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘लॉकडाउन के दौरान अपनी गतिविधियों के जरिए, चाहे यह कोरोना वायरस (कोविड-19) का मुद्दा हो या चीन की घुसपैठ का, राहुल गांधी ने अकेले ही मौजूदा सरकार को उसके कार्यों एवं नाकामियों के लिए जवाबदेह ठहराने का उल्लेखनीय काम किया है।’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि राहुल गांधी ने बेहतरीन दूरदृष्टि भी प्रदर्शित की है, एक रचनात्मक आवाज उठाई है, जिसके जरिए इस चुनौतीपूर्ण समय में लोगों की आकांक्षाओं को सचमुच में समझने की क्षमता दिखाई है। थरूर ने कहा, ‘‘मैं उम्मीद करता हूं कि अध्यक्ष के रूप में या फिर अपनी पसंद के किसी अन्य पद पर रहते हुए वह इसे जारी रखेंगे।’’

उल्लेखनीय है कि, पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली करारी शिकस्त की जिम्मेदारी लेते हुए राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद सोनिया गांधी ने 10 अगस्त को पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली थी।

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