पशुओं की खरीद-बिक्री के बैन को लेकर केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ के विरोध में आईआईटी मद्रास में ‘बीफ पार्टी’ आयोजित करने वाले एक छात्र की पिटाई को लेकर बुधवार(31 मई) को आईआईटी कैंपस के बाहर छात्रों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, इस प्रदर्शन में भारी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। छात्रों का आरोप है कि सरकार लोगों से अपनी पसंद का भोजन करने की आजादी छिन रही है।
फोटो: ANIबता दें कि आईआईटी मद्रास के परिसर में रविवार(28 मई) को आयोजित किए गए बीफ फेस्टिवल को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों ने मंगलवार(30 मई) को कथित रूप से एक पीएचडी छात्र को पीट दिया। आईआईटी के अधिकारियों ने कहा कि संस्थान घटना की जांच करेगा और उसके नतीजे के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, बीफ पार्टी से नाराज अज्ञात लोगों ने आयोजक सूरज को बुरी तरह पीटा। रविवार(28 मई) रात आईआईटी में करीब 80 छात्रों ने केंद्र सरकार के मवेशियों के बिक्री बैन के विरोध में यह यह आयोजित किया था। पीएचडी के छात्र सूरज बीफ फेस्ट के मुख्य आयोजक में से एक थे।
Chennai: Police removes protesters agitating in front of IIT-Madras against cattle slaughter ban & attack on a IIT-Madras PhD scholar pic.twitter.com/4rcZ7VLpq5
— ANI (@ANI) May 31, 2017
जानकारी के मुताबिक, करीब 80 छात्रों के समूह ने कैंपस में ‘बीफ फेस्ट’ का आयोजन किया था। छात्रों ने आरोप लगाया कि सरकार खाने की आजादी छीन रही है। उन्होंने मंडी में पशुओं की खरीद-बिक्री पर रोक वाली अधिसूचना को बीफ पर बैन करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।
पीड़ित के सहयोगियों के अनुसार अंबेडकर पेरियार स्टडी सर्किल से सम्बद्ध आर सूरज को संघ परिवार के समर्थक होने का दावा करने वाले कुछ छात्रों ने कथित रूप से मंगलवार दोपहर में पीटा। पीड़ित केरल का रहने वाला है। पीड़ित को संस्थान के चिकित्सालय में ले जाया गया और आंख में चोट लगने के कारण बाद में एक नेत्र अस्पताल भेज दिया गया।
केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने छात्र पर हुए हमले की निंदा करते हुए तिरूवनंतपुरम में एक बयान में कहा कि हमारा संविधान हमें अपनी पसंद का भोजन करने की आजादी देता है और असहिष्णुता का कोई भी कृत्य हमारे संविधान में निहित मूल अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से हमले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई करने को कहेंगे।
बता दें कि इससे पहले मंगलवार(30 मई) को केंद्र सरकार के फैसले पर मद्रास हाई कोर्ट ने चार सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। कोर्ट ने वध के लिए जानवरों की खरीद-बिक्री पर केंद्र के अध्यादेश पर रोक लगाते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है।
सेल्वागोमति और आसिक इलाही बाबा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एमवी मुरधीधरन और जस्टिस सीवी कार्तिकयन ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि खाने को चुनना सबका व्यक्तिगत अधिकार है और किसी को भी उसे तय करने का अधिकार नहीं है।