मवेशियों के कारोबार पर पाबंदी के बीच BJP नेता का वादा- मेघालय में पार्टी सत्ता में आई तो सस्ता होगा ‘गोमांस’

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वध के लिए पशुओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने को लेकर चल रहा विवाद बढ़ता ही जा रहा है। कई राज्य इस कानून का विरोध कर रहे हैं। इस बीच मेघालय में बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने राज्य में गोमांस प्रतिबंध पर सोमवार(29 मई) को डर को दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी मेघालय में इस तरह का प्रतिबंध कभी नहीं लगाएगी।बीजेपी के तूरा जिला अध्यक्ष बर्नाड एन मारक ने बयान जारी कर कहा कि मेघालय में बीजेपी के अधिकतर नेता गोमांस खाते हैं। मेघालय जैसे राज्य और खासकर गारो हिल्स में गोमांस पर प्रतिबंध लगाने का सवाल ही नहीं उठता। बता दें कि अगले साल ही मेघालय में विधानसभा चुनाव होने वाला है।

साथ ही मारक ने एलान किया कि अगर उनकी पार्टी राज्य की सत्ता में आती है तो मीट के दाम घटाए जाएंगे, इसमें गोमांस भी शामिल है। उन्होंने कहा कि मेघालय में पार्टी के ज्यादातर नेता गोमांस खाते हैं और केंद्र सरकार इसकी खपत पर पाबंदी नहीं लगा सकती है। साथ ही कहा कि बूचड़खानों को कानूनी रूप से मान्यता भी दी जाएगी।

मराक ने बताया कि मेघालय बीजेपी के नेता इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पहाड़ी इलाकों के संवैधानिक प्रावधानों से भलीभांति वाकिफ हैं और राज्य में गोमांस पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती। मराक ने आश्वस्त किया कि राज्य के लोगों को गोमांस बैन के मसले पर डरने या अन्य राजनीतिक पार्टियों से प्रेरित होने की जरूरत नहीं है।

हालांकि, राज्य बीजेपी अध्यक्ष सिबुन लिंगदोह ने कहा है कि बर्नार्ड द्वारा राज्य में गोमांस के दाम कम किए जाने वाली बातें उनकी निजी है, इसका पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ने चुनाव जीतने के बाद राज्य में बीफ के दाम करने जैसा कोई वादा नहीं किया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, केंद्र सरकार ने वध के लिये पशु बाजारों में मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे निर्यात एवं मांस तथा चमड़ा कारोबार प्रभावित होने की संभावना है। सरकार ने जीवों से जुड़ीं क्रूर परंपराओं पर भी प्रतिबंध लगाया है, जिसमें उनके सींग रंगना तथा उन पर आभूषण या सजावट के सामान लगाना शामिल है।

पर्यावरण मंत्रालय ने पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम के तहत सख्त ‘पशु क्रूरता निरोधक (पशुधन बाजार नियमन) नियम, 2017’ को अधिसूचित किया है। इसके तहत पशु बाजारों से मवेशियों की खरीद करने वालों को लिखित में यह वादा करना होगा कि इनका इस्तेमाल खेती के काम में किया जाएगा, न कि मारने के लिए। इन मवेशियों में गाय, बैल, सांड, बधिया बैल, बछड़े, बछिया, भैंस और ऊंट शामिल हैं।

अधिसूचना के मुताबिक पशु बाजार समिति के सदस्य सचिव को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी शख्स बाजार में अवयस्क पशु को बिक्री के लिये न लेकर आए। इसमें कहा गया है कि किसी भी शख्स को पशु बाजार में मवेशी को लाने की इजाजत नहीं होगी जब तक कि वहां पहुंचने पर वह पशु के मालिक द्वारा हस्ताक्षरित यह लिखित घोषणा-पत्र न दे जिसमें मवेशी के मालिक का नाम और पता हो और फोटो पहचान-पत्र की एक प्रति भी लगी हो।

इसके तहत मवेशी की पहचान के विवरण के साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि मवेशी को बाजार में बिक्री के लिये लाने का उद्देश्य उसका वध नहीं है। साथ ही नए नियमों के तहत यह भी शर्त जोड़ी गई है कि कोई भी खरीदार मवेशियों की छह महीने के भीतर बिक्री नहीं कर सकेगा। तीन महीने के भीतर नए नियम लागू किए जाएंगे।

कई राज्यों में विरोध

माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से मीट और लेदर के एक्सपोर्ट और ट्रेडिंग पर असर पड़ सकता है। पशुओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने कहा कि अगर आज उन्होंने पशु वध को प्रतिबंधित किया है तो वे कल मछली खाने पर रोक लगा देंगे।

वहीं, इस मामले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की कि उनकी सरकार इसे स्वीकार नहीं करेगी।उन्होंने केंद्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक बताया और कहा कि इसे कानूनी रूप से चुनौती दी जाएगी। इस मामले में हम राज्य के महाधिवक्ता से विचार-विमर्श करेंगे।

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