पशुओं की खरीद-बिक्री को लेकर केंद्र सरकार के आदेश पर मद्रास हाई कोर्ट ने 4 हफ्ते की लगाई रोक

0

पशुओं की खरीद-बिक्री को लेकर केंद्र सरकार के फैसले पर मद्रास हाई कोर्ट ने चार सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। कोर्ट ने वध के लिए जानवरों की खरीद-बिक्री पर केंद्र के अध्यादेश पर रोक लगाते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। सोमवार(29 मई) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मवेशियों को मंडियों में वध के लिए खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र की अधिसूचना को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी। 

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने अंतरिम फैसला सुनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार लोगों की ‘फूड हैबिट’ तय नहीं कर सकती। सेल्वागोमति और आसिक इलाही बाबा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एमवी मुरधीधरन और जस्टिस सीवी कार्तिकयन ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि खाने को चुनना सबका व्यक्तिगत अधिकार है और किसी को भी उसे तय करने का अधिकार नहीं है।

Also Read:  सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों के 'सरकार समर्थक' होने के आरोपों को बताया गलत, सोशल मीडिया में गाली-गलौज पर जताई चिंता

दरअसल, केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर वध के लिये पशु बाजारों में मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे निर्यात एवं मांस तथा चमड़ा कारोबार प्रभावित होने की संभावना है। सरकार ने जीवों से जुड़ीं क्रूर परंपराओं पर भी प्रतिबंध लगाया है, जिसमें उनके सींग रंगना तथा उन पर आभूषण या सजावट के सामान लगाना शामिल है।

पर्यावरण मंत्रालय ने पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम के तहत सख्त ‘पशु क्रूरता निरोधक (पशुधन बाजार नियमन) नियम, 2017’ को अधिसूचित किया है। इसके तहत पशु बाजारों से मवेशियों की खरीद करने वालों को लिखित में यह वादा करना होगा कि इनका इस्तेमाल खेती के काम में किया जाएगा, न कि मारने के लिए। इन मवेशियों में गाय, बैल, सांड, बधिया बैल, बछड़े, बछिया, भैंस और ऊंट शामिल हैं।

Also Read:  राजनाथ सिंह ने दिए संकेत जल्द ही जारी हो सकती है, 'सर्जिकल स्ट्राइक' की वीडियों फुटेज

अधिसूचना के मुताबिक पशु बाजार समिति के सदस्य सचिव को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी शख्स बाजार में अवयस्क पशु को बिक्री के लिये न लेकर आए। इसमें कहा गया है कि किसी भी शख्स को पशु बाजार में मवेशी को लाने की इजाजत नहीं होगी जब तक कि वहां पहुंचने पर वह पशु के मालिक द्वारा हस्ताक्षरित यह लिखित घोषणा-पत्र न दे जिसमें मवेशी के मालिक का नाम और पता हो और फोटो पहचान-पत्र की एक प्रति भी लगी हो।

इसके तहत मवेशी की पहचान के विवरण के साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि मवेशी को बाजार में बिक्री के लिये लाने का उद्देश्य उसका वध नहीं है। साथ ही नए नियमों के तहत यह भी शर्त जोड़ी गई है कि कोई भी खरीदार मवेशियों की छह महीने के भीतर बिक्री नहीं कर सकेगा। तीन महीने के भीतर नए नियम लागू किए जाएंगे।

Also Read:  बैडमिंटन :हांगकांग ओपन में साइना नेहवाल ने जीता पहला मैच

कई राज्यों में विरोध

माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से मीट और लेदर के एक्सपोर्ट और ट्रेडिंग पर असर पड़ सकता है। पशुओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने कहा कि अगर आज उन्होंने पशु वध को प्रतिबंधित किया है तो वे कल मछली खाने पर रोक लगा देंगे।

 

 

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here