भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर की गिरफ्तारी के बाद सहारनपुर में दो दिन के लिए फिर बंद हुआ इंटरनेट

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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक बार फिर से इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई है। जिलाप्रशासन की ओर से यह कदम दूसरी बार उठाया गया है। इससे पहले भारी हिंसा की वजह से नौ दिनों तक सहारनपुर में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं। प्रशासन की ओर से यह कदम भीम आर्मी संस्थापक चन्द्रशेखर की गिरफ्तारी के बाद उठाया गया है, क्योंकि चन्द्रशेखर की आज हिमाचल में गिरफ्तारी होते ही सोशल मीडिया पर कई तरह के मैसेज वायरल हो गये थे।

(HT File Photo)

जिले में कोई तनाव की स्थिति न बने इसके लिये जिलाधिकारी पी के पाण्डेय ने तत्काल प्रभाव से आदेश जारी करते हुए इण्टरनेट सेवाओं बंद कर दिया है। जिलाधिकारी पाण्डेय ने बताया कि इन आदेशों की अवहेलना की स्थिति में दोषी व्यक्ति के विरूद्ध भारतीय दण्ड सहिता की धारा 186 के अन्तर्गत कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि सहारनपुर में पिछले डेढ महीने से चार बार हुई हिसंक वारदातों को लेकर जिला प्रशासन ने पहले नौ दिन के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद की थी और अब फिर से जिले में शान्ति व्यवस्था बनाये रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।वहीं, चन्द्रशेखर की गिरफ्तारी के बाद सहारनपुर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है।

हालांकि, प्रशासन ने अभी तक चन्द्रशेखर की हिमाचल के डलहोजी से एसटीएफ और सहारनपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन एवं प्रशासनिक अधिकारी बैठक में जुट गये हैं। सहारनपुर में हुई हिंसा को भड़काने में चन्द्रशेखर का हाथ बताया जाता है और उस पर कई मामले दर्ज है और डीआईजी द्वारा चन्द्रशेखर पर 12 हजार का इनाम भी घोषित किया गया है।

इससे पहले सहारनपुर हिंसा मामले में 4 जून को शब्बीरपुर गांव में हुए हिंसा के मुख्य सूत्रधार बताए जा रहे प्रधान शिवकुमार को गिरफ्तार किया गया था। प्रशासन ने इण्टरनेट सेवा बंद कर दिया है। वहीं जिले में पुलिस, पीएसी, सीआरपीएफ गश्त कर रही है। जिले की सीमाओं पर जांच अभियान चलाया जा रहा है। कचहरी जिला मुख्यालय सहित तमाम संवेदनशील इलाकों में पुलिस तैनात है।

पढ़िए, सहारनपुर की क्या है पूरा मामला?

बता दें कि सहारनपुर में पहला दंगा 20 अप्रैल को हुआ था। तब सहारनपुर से बीजेपी के एमपी राघव लखनपाल शर्मा आंबेडकर जयंती का जुलूस बिना इजाजत निकाल रहे थे। उसमें हिंसा भड़क गई थी। जिसके बाद जिले के शब्बीरपुर गांव में महाराजा प्रताप जयंती के अवसर पर डीजे बजाने को लेकर ठाकुरों(राजपूत) और दलित समाज में 5 मई 2017 को बड़ा संघर्ष हुआ।

दलितों ने कथित तौर पर गांव से शोभायात्रा निकालने का विरोध किया और शोभायात्रा पर पथराव कर दिया। इस दौरान एक राजपूत युवक की मौत हो गई। शोभायात्रा पर पथराव की सूचना आसपास के गांवों के ठाकुर समाज के लोग भी वहां पहुंच गए। दोनों ओर से पथराव के साथ-साथ फायरिंग और तोड़फोड़ शुरू हो गई। इसके बाद शब्बीरपुल गांव के दलितों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई।

इस दौरान दलितों के 60 से ज्यादा मकान जला दिए गए थे और कई वाहन फूंक दिए थे। इसके बाद दलितों की भीम आर्मी की तरफ से इस घटना का विरोध किया गया था। वहीं, पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए 9 मई 2017 को सहारनपुर में इकट्ठा हुए दलितों का पुलिस से संघर्ष हो गया था। इस दौरान सहारनपुर में नौ जगहों पर हिंसा हुई।

इस मामले में भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर को नामजद किया गया। जिसके विरोध में 21 मई 2017 को हजारों दलितों ने दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। वहीं, 23 मई 2017 को एक बार फिर मायावती के दौरे के बाद दलितों और ठाकुरों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें सात लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से बाद में एक व्यक्ति की मौत हो गई।

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