…तो क्या ‘नोटबंदी’ की वजह से मध्य प्रदेश में शुरू हुआ किसानों का आंदोलन?

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बीजेपी शासित राज्य मध्यप्रदेश में फसलों के वाजिब दाम सहित अन्य मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन एक बार फिर हिंसक हो गया है। इस बीच सीहोर में किसानों के हंगामा करने की खबर है। किसानों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की और आंसू गैस के गोले दागे। बता दें कि मंदसौर में मंगलवार(6 जून) को पुलिस फायरिंग में गोली लगने से छह किसानों की मौत हो गई है।

फोटो: PTI

इस बीच किसान आंदोलन को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी इस हिंसा के पीछे कांग्रेस का हाथ बता रही है, हालांकि कांग्रेस इन आरोपों को खारिज कर रही है। इस बीच अब दावा किया जा रहा है कि मंदसौर में फैली इस हिंसा की एक वजह से नोटबंदी भी हो सकती है।

जी हां, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार(8 जून) को कहा है कि नोटबंदी के बाद नकदी रहित लेन-देन को बढ़ावा दिए जाने ने किसानों की मुश्किलें बढ़ गई। इसके अलावा बिजली संकट और सीमित मात्रा में बेचे जा रहे ‘डोडा चूरा’ की बिक्री पर सरकार द्वारा बैन लगाना कुछ ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन पैदा हुआ है।

बता दें कि अफीम की खेती से डोडा चूरा निकलता है और इसका सेवन करने से नशा होता है। इसका उपयोग कुछ दवाइयों को बनाने में भी किया जाता है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के इस अधिकारी ने न्यूज एजेंसी भाषा से कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने पिछले दो साल से मंदसौर और नीमच जिले के किसानों के डोडा चूरा बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसने हजारों किसानों विशेष रूप से मजबूत माने जाने वाले पाटीदार समुदाय के लोगों को बेरोजगार बना दिया है।

उन्होंने कहा कि प्रतिबंध लगाने से पहले प्रदेश सरकार डोडा चूरा की खेती और बिक्री को अवैध नहीं मानती थी, लेकिन अब सरकार इस मादक पदार्थ को अवैध मानकर नष्ट कर रही है। साथ ही अधिकारी ने कहा कि नोटबंदी के बाद राज्य सरकार मंडियों में किसानों को उनकी उपज का डिजिटल भुगतान कर रही है, इसने भी किसानों की समस्याओं को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि इसके चलते किसानों के पास नकद पैसे की कमी हो गई है।

अधिकारी ने कहा कि इसके अतिरिक्त किसान द्वारा पैदा की गई उपज की लागत भी अब दो कारणों से बहुत ज्यादा हो गई है। इनमें से एक कारण बिजली आपूर्ति में आई गिरावट है, जबकि दूसरा कारण उर्वरकों की कालाबाजारी है। उन्होंने कहा कि बिजली की कमी के कारण सिंचाई के लिए किसान डीजल से चलने वाले पंपों का उपयोग कर रहे हैं।

अगर किसान बिजली के बिल का फौरन भुगतान करने में चूकता है तो क्षेत्र की बिजली वितरण करने वाली कंपनी किसानों का बिजली कनेक्शन काट देती है। इसके अलावा प्रदेश में भ्रष्टाचार के चलते किसान कालाबाजारी करने वालों से उर्वरक बहुत ऊंचे दामों पर खरीद रहे हैं। इससे उनकी कृषि उपज की लागत बढ़ गई है।

फिर भड़की हिंसा

मध्यप्रदेश में फसलों के वाजिब दाम सहित अन्य मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन शुक्रवार(9 जून) को एक बार फिर हिंसक हो गया है। सीहोर में किसानों के हंगामा करने की खबर है। किसानों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की और आंसू गैस के गोले दागे। भोपाल के पास इंदौर हाईवे पर किसानों ने फिर हिंसा की और कई गाड़ियों में आग लगा दी।

इसके अलावा शाजापुर के शुजालपुर इलाके में भी उपद्रवियों ने एक वाहन में आग लगा दी। वहीं, फंदा में किसानों ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों और वाहनों पर पथराव शुरु कर दिया, जिसके बाद पुलिस को स्थितियां नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करते हुए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

एक और किसान की मौत

इस बीच मंदसौर हिंसा में घायल एक और किसान की मौत हो गई है। मंदसौर में हिंसा के दौरान पुलिस फायरिंग में घनश्याम गंभीर रुप से घायल हो गया था और उसका अस्पताल में इलाज चल रहा था। इसके अलावा मध्यप्रदेश के रायसेन में एक किसान श्रीकृष्ण मीणा ने भी जहर खाकर खुदकुशी कर ली है। उसने बैंक से 10 लाख का कर्ज लिया था, जिसे बैंक ने कुर्की का नोटिस भेजा था।

कर्फ्यू में दी गई ढील 

हालांकि, उधर मंदसौर में पुलिस फायरिंग में पांच किसानों की मौत से बने तनाव के बीच शुक्रवार को कर्फ्यू में ढील दे दी गई है। सुबह 10 बजे से शाम के 6 बजे तक शहरी इलाकों में कर्फ्यू हटाया गया है, लेकिन धारा 144 लागू रहेगी। इससे पहले गुरुवार को भी थोड़ी देर के लिए कर्फ्यू में ढील दी गई थी।

शिवराज सरकार का ‘यू-टर्न’

वहीं, गुरुवार(8 जून) को मध्य प्रदेश सरकार ने आखिरकार मान लिया कि मंदसौर में भड़के किसान आंदोलन में पांच लोगों की मौत पुलिस की गोली से ही हुई थी। राज्य के गृहमंत्री ने स्वीकारा कि किसानों पर पुलिस ने ही गोली चलाई थी।
गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पांच किसानों की मौत पुलिस की गोलीबारी में हुई है। जांच में इसकी पुष्टि हुई है।

बता दें कि इससे पहले इससे पहले पिछले दो दिनों से प्रदेश सरकार पुलिस फायरिंग से इनकार कर रही थी। भूपेंद्र सिंह समते राज्य सरकार के सभी अधिकारी अब तक यही कह रहे थे कि गोली अराजक तत्वों द्वारा चलाई गई थी। किसान लगातार इस दावे को खारिज कर रहे थे।

1 जून आंदोलन कर रहे हैं किसान

बता दें कि मध्यप्रदेश में किसानों ने गुरुवार(1 जून) को शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्ज माफी और अपनी फसल के वाजिब दाम की मांग को लेकर किसानों की हड़ताल अभी भी जारी है। किसानों ने पश्चिमी मध्य प्रदेश में अपनी तरह के पहले आंदोलन की शुरूआत करते हुए अनाज, दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति रोक दी है। सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ किसानों का आंदोलन 10 दिन तक चलेगा।

किसानों की प्रमुख मांगे

  • स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं।
  • किसानों को फसलों का उचित दाम मिले और समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए।
  • आलू, प्याज सहित सभी प्रकार की फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए।
  • आलू, प्याज की कीमत 1500 रुपये प्रति क्वंटल हो।
  • बिजली की बढ़ी हुई दरें सरकार जल्द से जल्द वापस लें।
  • आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।
  • मंडी शुल्क वापस लिया जाए।
  • फसलीय कृषि कर्ज की सीमा 10 लाख रुपए की जाए।
  • वसूली की समय-सीमा नवंबर और मई की जाए।
  • किसानों की कर्ज माफी हो।
  • मध्यप्रदेश में दूध उत्पादक किसानों को 52 रुपये प्रति लीटर दूध का भाव तय हो।

 

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