किसान आंदोलन: राहुल गांधी के बाद आज AAP नेता जाएंगे मंदसौर, पीड़ित परिवारों से करेंगे मुलाकात

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बीजेपी शासित राज्य मध्यप्रदेश में फसलों के वाजिब दाम सहित अन्य मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन हिंसक हो गया है। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में किसान आंदोलन के दौरान छह किसानों की मौत पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद गुरुवार(8 जून) को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी वहां पीड़ित किसानों के परिवारों से मिलने पहुंच गए।

Mandsaur transferred
फाइल फोटो: pti

इस बीच दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी(आप) का भी एक प्रतिनिधिमंडल आज(शुक्रवार) मंदसौर दौरे पर जा रहा है। साथ ही आप ने एलान किया है कि 10 जून से वे किसानों के हक में देश भर में प्रदर्शन करेंगे। बता दें कि मंदसौर में मंगलवार(6 जून) को पुलिस फायरिंग में गोली लगने से पांच किसानों समेत छह लोगों की मौत हो गई।

AAP प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किसानों के आंदोलन का कारण केंद्र और राज्य सरकारों की किसानों के प्रति ‘उदासीनता’ है। पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा कि, यूरोप, अफगानिस्तान या पाकिस्तान में अगर कोई छोटी-सी घटना भी होती है, तो दुनिया में इस पर ट्वीट करने वाले पहले शख्स हमारे पीएम होते हैं। वह सबसे पहले इन पर बोलते हैं, लेकिन, उन्होंने किसानों की मौत पर एक शब्द भी नहीं बोला।

साथ ही सिंह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात को पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए ट्वीट किया, ‘मोदी जी ने नवाज़ शरीफ़ की माँ और परिवार का हाल पूछा, काश PM साहेब देश में मर रहे किसान,जवान की माँ का हाल भी पूछ लेते।’

बता दें कि गुरुवार(8 जून) को कजाकिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन के स्वागत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का आमना-सामना हुआ। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने शरीफ और उनकी मां की सेहत का हालचाल पूछा।

हिरासत में लिए गए राहुल गांधी

गुरुवार(8 जून) को मंदसौर जाने पर अड़े कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को मध्य प्रदेश पुलिस ने नीमच जिले के जीरण में हिरासत में ले लिया। करीब सवा चार घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। जिसके बाद राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमा पर मारे गए किसानों के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।

(Twitter/INC India)

पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद राहुल ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि कर्ज माफ होता है तो हिंदुस्तान के 50 सबसे अमीर लोगों का होता है, किसानों का नहीं होता। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि पीड़ित परिवारों की मांग है कि मारे गए किसानों को शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह बात उठाएगी और पूरी मदद करेगी। राहुल ने मांग की कि किसानों पर गोली चलाने वालों पर कार्रवाई होना चाहिए।

कई जिलों में फैली मंदसौर हिंसा की आग

मंदसौर हिंसा की आग अब कई अन्य जिलों में फैलती जा रही है। मंदसौर और दूसरे कई जिलों में किसानों का आंदोलन उग्र होने की वजह से हिंसक घटनाएं बढ़ रही हैं। गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने मंदसौर में एक टोल प्लाजा में तोड़फोड़ की और वहां रखे 8-10 रुपये लूट लिए। वहीं, शाजापुर जिले में आक्रोशित किसानों ने एक सरकारी ट्रक और चार बाइकों में आग लगा दी। रोकने पहुंचे एसडीएम को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। उनके पैर में फ्रेक्चर हुआ और वे बेहोश हो गए।

शिवराज सरकार का ‘यू-टर्न’

वहीं, गुरुवार(8 जून) को मध्य प्रदेश सरकार ने आखिरकार मान लिया कि मंदसौर में भड़के किसान आंदोलन में पांच लोगों की मौत पुलिस की गोली से ही हुई थी। राज्य के गृहमंत्री ने स्वीकारा कि किसानों पर पुलिस ने ही गोली चलाई थी।
गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पांच किसानों की मौत पुलिस की गोलीबारी में हुई है। जांच में इसकी पुष्टि हुई है।

बता दें कि इससे पहले इससे पहले पिछले दो दिनों से प्रदेश सरकार पुलिस फायरिंग से इनकार कर रही थी। भूपेंद्र सिंह समते राज्य सरकार के सभी अधिकारी अब तक यही कह रहे थे कि गोली अराजक तत्वों द्वारा चलाई गई थी। किसान लगातार इस दावे को खारिज कर रहे थे।

1 जून आंदोलन कर रहे हैं किसान

बता दें कि मध्यप्रदेश में किसानों ने गुरुवार(1 जून) को शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्ज माफी और अपनी फसल के वाजिब दाम की मांग को लेकर किसानों की हड़ताल अभी भी जारी है। किसानों ने पश्चिमी मध्य प्रदेश में अपनी तरह के पहले आंदोलन की शुरूआत करते हुए अनाज, दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति रोक दी है। सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ किसानों का आंदोलन 10 दिन तक चलेगा।

किसानों की प्रमुख मांगे

  • स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं।
  • किसानों को फसलों का उचित दाम मिले और समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए।
  • आलू, प्याज सहित सभी प्रकार की फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए।
  • आलू, प्याज की कीमत 1500 रुपये प्रति क्वंटल हो।
  • बिजली की बढ़ी हुई दरें सरकार जल्द से जल्द वापस लें।
  • आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।
  • मंडी शुल्क वापस लिया जाए।
  • फसलीय कृषि कर्ज की सीमा 10 लाख रुपए की जाए।
  • वसूली की समय-सीमा नवंबर और मई की जाए।
  • किसानों की कर्ज माफी हो।
  • मध्यप्रदेश में दूध उत्पादक किसानों को 52 रुपये प्रति लीटर दूध का भाव तय हो।

 

 

 

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