कोर्ट परिसर में फूट-फूटकर रो पड़ी स्वाति मालीवाल, निर्भया मामले पर सरकार की लापरवाही से हो गई थी मायूस

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गुरुवार को दिल्ली के महिला आयोग की अध्यक्ष, स्वाति मालीवाल निर्भया बलात्कार मामले पर सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय परिसर के अंदर ही फूट-फूटकर रो पड़ी।

स्वाती मालीवाल

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के खतरे में बढ़ोतरी के चलते मालीवाल ने जस्टिस रवींद्र भट्ट और संजीव सचदेवा को रोते हुए संज्ञान दिलाया कि एक पखवाड़े पहले, उच्च न्यायालय ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय से महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि के लिए पुलिस संसाधनों को बढ़ाने के लिए एक योजना तैयार करने के लिए कहा था।

लेकिन गुरुवार को दोनों मंत्रालयों की और से पूर्व की तरह ही नौकरशाही बाधाओं का हवाला देते हुए कोई ठोस योजना प्रस्तुत नहीं की जा सकी। े दोनों मंत्रालयों की और से इस बारें में कोई ठोस कदम नहीं उठाने की योजना विफल रही।

अदालत कक्ष के अंदर मौजूद संवाददाताओं ने बताया कि इसके बाद जाहिर हुआ कि मालीवाल बेहद टूट गई। जबकि एक पत्रकार ने बताया कि वह पहले ही दो दिन पूर्व हुई एक डेढ वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार की घटना से बहुत आहत थी उसके बाद इस तरह के मामलों की रोकथाम को लेकर सरकारी उदासीनता ने उन्हें हताश कर दिया।

इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस आयुक्त अमुल्य पटनायक को 11 दिसंबर को अदालत में उपस्थित रहने के लिए कहा, जिसमें महिलाओं के खिलाफ अपराधों को कम करने की योजना को अमल में लाया जा सके। अदालत ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था कि वह आवेदन पर अपना रुख स्पष्ट करें।

16 दिसंबर 2012 की घटना ने देश को चैंक दिया था जिसके बाद उच्चतम न्यायालय ने महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर संज्ञान लिया और जल्द ही अपराधियों को गिरफ्तार किया था जो इस मामले में शामिल थे।

इस महीने की शुरूआत में ही एक 18 महीने की बच्ची के साथ बलात्कार की खबर से पूरी दिल्ली चैंक गई थी जिसको लेकर मालीवाल ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह के निवास के सामने विरोध किया और मांग की थी कि वह पीड़ित के उस दर्द को समझने के लिए आगे आए जिसे वह भोग रही है।

आपको बता दे कि बलात्कारियों के लिए मौत की सजा की मांग कर रही मालीवाल पिछले 10 दिनों से अधिक होने पर अपना सत्याग्रह जारी रखें हुए है। मालीवाल महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों के लिए दोषी पाए जाने वाले लोगों के लिए गम्भीर दंड की मांग कर रही है।

आपको बता दे कि महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने और बलात्कारियों को 6 महीने के अंदर फांसी देने की मांग को लेकर आयोग की टीम के साथ खुद स्वाति पिछले 8 दिनों से लगातार दिन-रात काम कर रही हैं। यह अभियान बाल दिवस (14 नवंबर) तक चलेगा। इन एक सप्ताह के दौरान स्वाति को एक पल भी आराम करने का मौका नहीं मिला है।

इस सत्याग्रह के दौरान आयोग की अध्यक्ष स्वाति अपने घर तक नहीं जा पा रही हैं। खुद स्वाति सहित आयोग की टीम रात के वक्त दिल्ली के अलग-अगल हिस्सों में जा रहे हैं और महिला सुरक्षा समेत महिलाओं से जुड़े अन्य मामलों की जानकारी ले रहे हैं। स्वाति का कहना है कि हम लोग ज्यादा से ज्यादा कम कर के अपना विरोध जताएंगे।

 

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