CAA Protest: बिजनौर हिंसा में अदालत ने 48 आरोपियों को दी जमानत, यूपी पुलिस नहीं कर सकी सबूत पेश

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नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ देश के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से जमकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे है। इस प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों में हिंसात्मक घटनाएं भी हुईं, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। 20 दिसंबर को यूपी के कई जिलों में CAA का प्रदर्शन हिंसक हो गया, बिजनौर के नगीना में भी हिंसा हुई थी। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार किया था। लेकिन यूपी की एक स्थानिय अदालत ने इस मामले में 48 लोगों को जमानत दे दी।

बिजनौर
फाइल फोटो: सोशल मीडिया

बिजनौर जिले की एक अदालत ने पिछले साल दिसंबर में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच दंगा करने और हत्या का प्रयास करने के आरोपी 48 लोगों को जमानत दे दी। पुलिस ने संबंधित मामलों में मुकदमा दर्ज किया था। अदालत ने बुधवार को 83 आरोपियों में से 48 द्वारा दायर जमानत याचिका की सुनवाई की। इस दौरान न्यायाधीश ने पुलिस की अब तक की जांच पर कुछ तीखे बयान दिए।

समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, जमानत का आदेश देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि, “पुलिस की प्राथमिकी में कहा गया है कि भीड़ ने पुलिस पर गोलीबारी की, लेकिन अदालत के सामने हथियार बरामदगी से संबंधित कोई भी सबूत नहीं पेश किया गया।” न्यायाधीश ने कहा, “सरकारी वकील अदालत में ऐसा कोई सबूत पेश करने में नाकाम रहे हैं, जिससे पता चले कि भीड़ में से किसी ने पुलिस पर गोली चलाई थी। न ही यह सबूत दिया गया है कि किसी भी निजी वाहन या दुकानों में तोड़फोड़ की गई थी” उन्होंने कहा, “सरकारी वकील ने कहा कि घटना में 13 पुलिसकर्मियों के चोटें लगी हैं, लेकिन इन सभी लोगों की चिकित्सा रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ये बेहद मामूली चोटें हैं।”

पिछले साल 20 दिसंबर को हुए प्रदर्शन के दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी और पुलिस ने माना है कि उनमें से एक की मौत पुलिस की गोली से हुई है। यह सूबे की पुलिस ने अपनी गोलीबारी में किसी की मौत होने का यही एक मामला कबूल किया है। झड़प के बाद कुल 83 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि, नागरिकता संशोधन कानून का कांग्रेस, टीएमसी समेत लगभग सभी विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं। दिल्ली, यूपी, पश्चिम बंगाल, बिहार, असम में इस ऐक्ट के विरोध में जोरदार प्रदर्शन हुए थे। देश की कई हिस्सों में लोग इसका विरोध करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली में भी हिंसक प्रदर्शन हुए थे।

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