हाल ही में निति आयोग के CEO अमिताभ कांत ने पहली मर्तबा ये स्वीकार किया था कि भारत आर्थिक मंदी के दौर से गुज़र रहा है और इस के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आर्थिक सुधार पर लिए गए क़दम को ज़िम्मेदार ठहराया था। सरकार के एक अंग द्वारा आर्थिक मंदी की बात स्वीकारे जाने के बाद भाजपा की विरोधी पार्टियों ने सरकार की वित्तीय निति पर सवाल खड़ा करने शुरू कर दिए हैं।
वहीँ इस मुद्दे पर चर्चा उस वक़्त और भी दिलचस्प हो गई जब कांग्रेसी नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने निर्मला सीथारमन को हटाकर भाजपा के राज्य सभा सांसद सुब्रमनियन स्वंय को नया वित्त मंत्री बनाये जाने की वकालत कर डाली।
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “बहुत से लोगों की राय में सुब्रमनियन स्वंय वित्त मंत्री के लिए सबसे अच्छे उम्मीदवार हैं। दरअसल बहुत से भाजपा के समर्थकों का भी यही मानना है। तो भाजपा को लोगों की आवाज़ सुनने से कौन रोक रहा है अगर ये पार्टी लोगों के इच्छानुसार काम करने में विश्वास रखती है? ”
A lot of people in my mentions talk about Subramaniam Swamy as an ideal BJP candidate for Finance. In fact a lot of BJP core supporters think so too. What stops BJP from listening to the people if they work as per where the heart of the people is?
— Abhishek Singhvi (@DrAMSinghvi) July 31, 2019
प्रधानमंत्री के दुसरे कार्यकाल में अरुण जेटली की जगह वित्त मंत्री न बनाये जाने पर स्वामी ने कहा था कि उनको वित्त मंत्रालय की ज़िम्मेदारी ना देने के पीछे असल कारण ये था कि वो गुनहगारों को छोड़ने के समर्थक नहीं हैं चाहे वो गुनहगार खुद उनकी पानी पार्टी भाजपा से क्यों न हों।
अमिताभ कांत के वित्तीय मंदी पर बयान के जवाब में स्वामी ने ट्विटर पर लिखा, “उन्हें (कांत को ) 2016-17 में मेरे समर्थन में बोलना चाहिए था जब मैं ने इस के बारे में पहली बार चेतावनी दी थी। “