राफेल के अहम दस्तावेज चोरी: यूजर्स बोले- “ये तो गोपनीय सरकारी रक्षा दस्तावेज हैं, ऐसे मसलों में तो सैकड़ों ‘लोग’ गायब हो जाते हैं”

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राफेल लड़ाकू विमान सौदे को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज करने के अपने 14 दिसंबर के फैसले की समीक्षा वाली अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार (6 मार्च) को सुनवाई हुई। इस दौरान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राफेल विमान सौदे से संबंधित अहम दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी किए गए हैं और याचिकाकर्ता इन दस्तावेजों के आधार पर विमानों की खरीद के खिलाफ याचिकाएं रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार चाहते हैं।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने अपने 14 दिसंबर, 2018 के फैसले पर पुनर्विचार के लिए पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी तथा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। पुनर्विचार याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि शीर्ष अदालत में जब राफेल सौदे के खिलाफ जनहित याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया तो केंद्र ने महत्वपूर्ण तथ्यों को उससे छुपाया था।

सोशल मीडिया पर घमासान

सरकार ने राफेल सौदे से जुड़े अहम दस्तावेजों के चोरी होने की जानकारी जैसे ही सुप्रीम कोर्ट को दी सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया। राफेल का दस्तावेज चोरी होने को लेकर लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा है, “इसका मतलब मोदी जी ने चोरी की है। अब सारे काग़ज़ ग़ायब कर दिए। अगर चोरी नहीं की होती तो काग़ज़ ग़ायब करने की क्या ज़रूरत थी? ऐसा प्रधान मंत्री देश के लिए बेहद ख़तरनाक है जो सेना से सम्बंधित काग़ज़ ही ग़ायब करवा दे।”

वहीं, मशहूर कवि और आम आदमी पार्टी के बागी नेता कुमार विश्वास ने मोदी सरकार पर तंज सकते हुए लिखा है, “लो जी….न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी ? ये तो गोपनीय-सरकारी रक्षा दस्तावेज हैं! ऐसे मसलों में तो सैकड़ों “लोग” गायब हो जाते हैं! ये बड़ी जाँची-परखी “व्यापम” आदत है! ?? भगवान मालिक है या वो मालिक हैं जो इन दिनों भगवान हैं ?”

देखिए, लोगों की प्रतिक्रियाएं:

‘द हिंदू’ के लेख का सरकार ने किया विरोध

वकील प्रशांत भूषण ने जब ‘द हिंदू’ अखबार के वरिष्ठ पत्रकार एन राम के एक लेख का हवाला दिया तो अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने इसका विरोध किया और कहा कि यह लेख चोरी किए गए दस्तावेजों पर आधारित हैं और इस मामले की जांच जारी है। वेणुगोपाल ने कहा कि इस वरिष्ठ पत्रकार का पहला लेख छह फरवरी को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित हुआ और बुधवार के संस्करण में भी एक खबर है जिसका मकसद न्यायालय की कार्यवाही को प्रभावित करना है और यह न्यायालय की अवमानना के समान है।

वेणुगोपाल ने पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करने और ‘द हिंदू’ में प्रकाशित लेखों के आधार पर प्रशांत भूषण द्वारा बहस करने पर आपत्ति की तो पीठ ने केंद्र से जानना चाहा कि जब वह आरोप लगा रही है कि ये लेख चोरी की सामग्री पर आधारित हैं तो उसने इसमें क्या किया है?

सिन्हा, शौरी और स्वंय अपनी ओर से बहस शुरू करते हुए भूषण ने कहा कि राफेल सौदे के महत्वपूर्ण तथ्यों को उस समय छुपाया गया जब इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और इसकी जांच के लिए याचिका दायर की गई थी। उन्होंने कहा कि अगर इन तथ्यों को न्यायालय से छुपाया नहीं गया होता तो निश्चित ही शीर्ष अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करके जांच कराने के लिए दायर याचिका रद्द नहीं की होती।

चोरी दस्तावेजों की जांच जारी

हालांकि, वेणुगोपाल ने कहा कि भूषण जिन दस्तावेजों को अपना आधार बना रहे हैं, उन्हें रक्षा मंत्रालय से चोरी किया गया है और इस मामले में जांच जारी है। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि भूषण को सुनने का मतलब यह नहीं है कि शीर्ष अदालत राफेल सौदे के दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर ले रही है। उन्होंने वेणुगोपाल से जानना चाहा कि इस सौदे से संबंधित दस्तावेज चोरी होने के बाद सरकार ने क्या कार्रवाई की।

अटार्नी जनरल ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने जिन दस्तावेजों को अपना आधार बनाया है, उन पर गोपनीय और वर्गीकृत लिखा था और इसलिए यह सरकारी गोपनीयता कानून का उल्लंघन है। वेणुगोपाल ने पुनर्विचार याचिकाओं और गलत बयानी के लिए दायर आवेदन रद्द करने का अनुरोध किया, क्योंकि इनका आधार चोरी के दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि आज (6 मार्च) के ‘द हिंदू’ अखबार की राफेल के बारे में खबर शीर्ष अदालत की कार्यवाही को प्रभावित करने जैसा है और यह अपने आप में न्यायालय की अवमानना है। इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख सुप्रीम कोर्ट ने 14 मार्च तय की है। (इनपुट- पीटीआई/भाषा के साथ)

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