इस वर्ष अब तक अकेल हिमाचल प्रदेश में Scrub Typhus नामक एक अज्ञात और दुर्लभ वायरस ने 14 लोगों की जान ले ली हैं जिससे समूची मेडिकल बिरादरी को चिंतित कर दिया है।
शिमला जिले के रामपुर में इस बीमारी का नवीनतम शिकार एक 45 वर्षीय एक महिला पूर्ण देवी है जिन्हें इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां उनका गुरुवार शाम उनका निधन हो गया।
वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रोमेश ने समाचार एजेंसी भाषा को बताया कि Scrub Typhus पीड़ित होने की वजह से इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई।
उन्होंने कहा कि IGMC में मरने वालों की संख्या 13 हो गई है जबकि कांगड़ा जिले के टांडा मेडिकल कॉलेज में एक अन्य मरीज की मृत्यु भी इसी कारण से हुई थी।
इस मामले में अभी तक, IGMC में भर्ती हुए 300 मरीजों की जांच की गई है। अधिकारियों को हवाले से बताया गया कि मॉनसून के दौरान और बाद के दिनों में घास में पाए गए कीट से यह वायरस फैलता है। स्क्रब के बढ़ते मामलों को लेकर हड़कंप मच गया है। IGMC व स्वास्थ्य विभाग ने स्क्रब को लेकर अर्लट भी जारी कर दिया है।
उत्तर प्रदेश में, जो कि पहले ही कई बच्चों की मौत और बीमारियों के कारण सुर्खियों में था अब इस Scrub Typhus वायरस की चपेट में आ रहा हैं। जबकि स्वास्थ्य अधिकारियों ने राज्य भर के अस्पतालों को ऐसे मामलों से निपटने के लिए एंटीबायोटिक्स के स्टॉक को रखने के लिए लिखा है।
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों व विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि यदि किसी भी व्यक्ति का तेज बुखार चार दिन से अधिक हो जाए तो वह तुरंत अस्पताल पहुंच कर जांच करवाएं। यह स्क्रब टॉयफस हो सकता है। चिकित्सकों के अनुसार बरसात में काम करने के लिए घर से बाहर जाते हैं तब रास्ते में, जंगलो में या खेतों में काम करते समय पिस्सू नाम का इस जीवाणु के काटने से स्क्रब टायफस वायरस शरीर में चला जाता है और 48 से 72 घंटों के अंदर अपना असर दिखाना शुरू कर देता है।
मरीज को 104 से 105 तक बुखार आता है। कंपकपी और जोड़ो में दर्द होना। शरीर का टूटना। अगला लक्षण है शरीर में ऐंठन और अकडऩ आना। बाजू, हाथ और गर्दन में गिल्टियां होना।
यह पहला ऐसा स्क्रब टाइफस का केस है, जिसमें मरीज के शरीर में स्पष्ट घाव देखने को मिला। इस घाव को पहचानने के बाद मरीज का इलाज शुरू किया गया, मरीज का पेशाब बंद हो गया था। अब वह सामान्य है। उसका इलाज किया जा रहा है। मरीज में लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज आवश्यक है। स्क्रब टाइफस एईएस का एक कारण है।
डा. आरके श्रीवास्तव, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय