रिपब्लिक टीवी द्वारा शशि थरूर को परेशान करने का आदेश दिए जाने के बाद चैनल से इस्तीफा देने वाले पत्रकार ने कांग्रेस सांसद से मांगी माफी

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल की तिरुअनंतपुरम सीट से सांसद शशि थरूर के मुताबिक अर्नब गोस्वामी के चैनल  रिपब्लिक टीवी द्वारा उन्हें परेशान करने का आदेश दिए जाने के बाद इस्तीफा देने वाले पत्रकार ने उनसे माफी मांगी है। सांसद के मुताबिक दीपू अबी वर्गिस नाम के पत्रकार को उन्हें परेशान करने के लिए रिपब्लिक टीवी से आदेश जारी किया गया था, जिसके बाद पत्रकार ने चैनल से इस्तीफा दे दिया था।शशि थरूर ने खुद शुक्रवार (12 जनवरी) को रिपब्लिक टीवी के पूर्व पत्रकार दीपू अबी वर्गिस के साथ अपनी तस्वीर पोस्ट कर इस बात की जानकारी दी। कांग्रेस सांसद ने अपने आधिकारिक ट्विटर पर इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि पत्रकार ने उनसे माफी मांगने के लिए प्रेस कल्ब में मुलाकात की।

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थरूर ने लिखा है कि मैं इस पत्रकार के नैतिक हिम्मत का कायल हो गया हूं। जिसने रिपब्लिक टीवी द्वारा मुझे परेशान करने का आदेश दिये जाने के बाद चैनल से इस्तीफा दे दिया और उनसे प्रेस कल्ब में मुलाकात कर माफी मांगी। थरूर ने बताया कि वर्गेस अंग्रेजी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ में भी काम कर चुके हैं। कांग्रेस सांसद ने पत्रकार की तारीफ करते हुए उनके साहस की सराहना की है।

पत्रकार दीपू अबे वर्गेस ने भी शशि थरूर के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें धन्यवाद कहा है। दीपू अबी वर्गिस ने शशि थरूर के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए उनका धन्यवाद करते हुए कहा कि मैंने गलत के खिलाफ आवाज़ उठाई है। सोशल मीडिया पर पत्रकार की सराहना हो रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले रिपब्लिक टीवी की एक अन्य महिला पत्रकार और वरिष्ठ संवाददाता श्वेता कोठारी ने संपादक द्वारा डराने, धमकी देने और उत्पीड़न करने का आरोप लगाकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। श्वेता ने ट्विटर पर एक पोस्ट लिख सार्वजनिक तौर पर बताया था कि कैसे उन पर शशि थरूर से मिलीभगत के आरोप में बेवजह शक किया जा रहा था।

बता दें कि कांग्रेस नेता शशि थरूर ने रिपब्लिक टीवी और चैनल के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के खिलाफ अपनी पत्नी सुनंदा पुष्कर की रहस्यमयी मौत मामले में ‘गलत रिपोर्टिंग’ करने का आरोप लगाते हुए दो करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा किया हुआ है। दिल्ली हाई कोर्ट ने थरूर की याचिका पर अर्नब गोस्वामी और उनके चैनल से जवाब मांगते हुए कहा था कि वे सांसद के ‘‘चुप रहने के अधिकार’’ का सम्मान करें।

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