राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग के एक आदेश को लेकर हंगामा शुरू हो गया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी कर डॉक्टरों की ‘जाति’ बताने के लिए कहा है। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद संबंधित अधिकारियों ने कहा कि यह रुटीन में जानकारी मांगी जाती है। हमने चार श्रेणियों में चार जिलों के डॉक्टरों की जानकारी मांगी है। गलती से आदेश में ‘जाति’ लिख दिया गया था।
फाइल फोटो: Indian Expressदरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने चार जिले जिसमें बाड़मेर, नागौर, जोधपुर और बीकानेर जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को एक आदेश भेजा गया है। इस आदेश में विभाग ने कहा है कि वे अपने अधीन ब्लॉक सीएमएचओ, सीएचसी, पीएचसी केंद्रों के प्रभारी अधिकारियों के नाम, पद, जाति और कब से कार्यरत हैं इसकी जानकारी भेजें।
हालांकि, ऐसी जानकारी मांगने पर डॉक्टरों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। चिकित्सक तबके का कहना है कि सिर्फ चार जिले में ही ऐसे आदेश क्यों जारी किए गए हैं। साथ ही चार जिलों में भी सभी डॉक्टर्स को छोड़कर सिर्फ प्रभारी अधिकारी डॉक्टर्स की जाति क्यों पूछी जा रही है।
चिकित्सक संघ का कहना है कि चिकित्सक का पेशा किसी धर्म अथवा जाति से नहीं होता, बल्कि सेवा से होता है। फिर इस तरह की जानकारी मांगना ठीक नहीं है। वहीं, राज्य स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. वी.के. माथुर ने इस पर अजीबो गरीब बयान देते हुए कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर करने के लिए ऐसा किया गया है।
उन्होने बताया कि जाति के आधार पर डॉक्टर की सूचना होने से बेहतर काम होगा और हमें काम में आसानी होगी। इस रिपोर्ट के जरिए कैटेगरी वाइस डिस्ट्रीब्यूशन की नीति निर्धारण की मंशा है। हालांकि, बाद ने माथुर ने इस आदेश को टाइपिंग की गड़बड़ी बता दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की जाति पूछने की सूचना गलत है।