पीएम मोदी को जिताने की अपील वाले गवर्नर कल्याण सिंह के बयान को चुनाव आयोग ने आचार संहिता का उल्लंघन माना, छोड़ना पड़ सकता है राज्यपाल का पद

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लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में दिए गए एक बयान से राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। राज्यपाल के इस बयान को चुनाव आयोग ने आचार संहिता का उल्लंघन माना है। उल्लेखनीय है कि सिंह ने हाल ही में अपने गृह जनपद अलीगढ़ में अपने आवास पर बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने की अपील की थी। अब सिंह के इस बयान पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया है और इसे आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन माना है। चुनाव आयोग की ओर से राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से इसकी शिकायत भी की गई है।

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, चुनाव आयोग ने इस संबंध में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक पत्र लिखा है। चुनाव आयोग ने राज्यपाल कल्याण सिंह के बयान पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सोमवार रात पत्र लिखा और पत्र में उनके बयान की शिकायत की गई। माना जा रहा है कि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने के चलते कल्याण सिंह को राज्यपाल का पद भी छोड़ना पड़ सकता है।

एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, कल्याण सिंह के मामले में चुनाव आयोग ने पिछले हफ्ते उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी थी। 30 मार्च को चुनाव आयोग ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त से रिपोर्ट तलब की थी। जिसके बाद इस रिपोर्ट की जांच करने के बाद चुनाव आयोग ने माना है कि कल्याण सिंह के बयान संवैधानिक पद की निष्पक्षता और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है।

खबर के अनुसार, कल्याण सिंह बीते हफ्ते अलीगढ़ में थे और यहां पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि देश के लिए यह काफी अहम है कि नरेंद्र मोदी एक बार फिर प्रधानमंत्री बनें। कल्याण सिंह ने 23 मार्च को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में कहा था, ”हम सभी लोग बीजेपी के कार्यकर्ता हैं और इस नाते से हम जरूर चाहेंगे कि बीजेपी विजयी हो। सब चाहेंगे एक बार फिर से केंद्र में मोदीजी प्रधानमंत्री बनें। मोदीजी का प्रधानमंत्री बनना देश के लिए आवश्यक है, समाज के लिए आवश्यक है।”

उल्लेखनीय है कि 1990 में चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल गुलशेर अहमद की चुनाव में अपने पुत्र के पक्ष में चुनाव प्रचार करने पर नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद अहमद ने राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया था।उस समय हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे गुलशेर अहमद को मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ रहे अपने बेटे सईद अहमद के लिए चुनाव प्रचार करते पाया गया था। चुनाव आयोग ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी जिसके बाद गुलशेर अहमद ने अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

 

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