केरल में एक दुर्लभ वायरस की चपेट में आने से एक ही परिवार के तीन लोगों सहित कुल 16 लोगों की मौत हो गई है। सोमवार को केरल के कोझिकोड जिले में एक और व्यक्ति इस वायरस का शिकार हो गया। वहीं, पुणे स्थित नेशनल वर्गोलॉजी इंस्टीट्यूट (NIV) ने स्पष्ट किया है कि केरल के कोझिकोडे में संदिग्ध बीमारी से पीड़ित लोग निपाह वायरस से संक्रमित हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्च वैज्ञानिकों ने बताया है कि यह वायरस खासकर जमगादड़, सुअर और अन्य जानवरों के माध्यम से फैलता है। निपाह वायरस के संक्रमण पर काबू पाने के लिए भारत सरकार ने विशेषज्ञों की एक टीम को केरल भेजा है। ताकि हालात पर समय रहते काबू पाया जा सके।
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. के. श्याला ने स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों की एक बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कहा, ‘जिस विषाणु से यह बीमारी पैदा की, उसका प्रकार अबतक पता नहीं चला है। खून और अन्य नमूने पुणे के राष्ट्रीय विषाणु संस्थान भेजे गये हैं, कुछ दिनों में परिणाम उपलब्ध होगा।’
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने अब तक तीन मौतों की पुष्टि की है। वहीं, मनोरम न्यूज़ वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के कोझिकोड और मलप्पुरम जिलों में दो हफ्तों के भीतर इस घातक वायरस से एक नर्स समेत 16 लोगों की मौत हो गई है।
रविवार (20 मई) को इस वायरस से पीड़िता नर्स की मौत हो गई, जो कि तालुक अस्पताल में काम करती थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती मरीजों के संपर्क में आने के बाद नर्स भी उसकी शिकार हो गई।
केरल में इस वायरस के फैलने का शक होने पर कुछ मरीजों के ब्लड सैम्पल नेशनल वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट पुणे भेजे गए। वहां से पता लगा कि यह निपा वायरस ही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, निपाह वायरस पहली बार 1998 में मलेशिया के कैम्पुंग सुंगाई निपाह में सामने आया था। यहां सुअरों के जरिए इंसनों में वायरस फैला था। चूंकि निपाह नाम जगह में इसकी पहचान हुई इसलिए इस वायरस का नाम निपाह वायरस रखा गया। दूसरा बार इस वायरस का संक्रमण 2004 बंग्लादेश में सामने आया था। यहां यह बीमारी चमगादड़ों से संक्रमित खजूर खाने से इंसानों में फैली थी।