जबरदस्त ‘दबाव’ के चलते मोदी सरकार ने एनडीटीवी के बैन को स्थगित किया

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कल सुप्रीम कोर्ट में एनडीटीवी ने अपने ऊपर एक दिन के प्रतिबन्ध केलिए सरकार को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी लेकिन शाम होते होते सूचना प्रसारण मंत्रालय ने एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन के बैन लगाने के अपने आदेश को स्थगित कर दिया है।

सरकार के एक दिन के प्रतिबंध के इस फैसले पर भारत ही नहीं वैश्विक पटल पर आलोचनओं का दौर शुरू हो चुका था।

इसके अलावा एनडीटीवी ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार को चुनौती दे डाली थी। व्यापक दबाब के चलते सूचना प्रसारण मंत्रालय को अपने ही फैसले को बदलना पड़ा और एनडीटीवी पर लगे प्रतिबंध को स्थगित कर दिया। आपको बता दे कि सरकार के इस फैसले के विरोध में ‘जनता का रिर्पोटर’ ने भी उस दिन आॅफ एयर होने का निर्णय लिया था।

कल यानी सोमवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में पत्रकारों ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा निकाला था।

वहीं एएनआई के अनुसार, हाल फिलहाल नौ नवंबर के ब्‍लैक आउट आदेश को होल्‍ड पर रखा गया है। ज्ञात हो कि सरकार ने एनडीटीवी इंडिया पर इसी साल जनवरी में पठानकोट एयरफोर्स बेस पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान संवेदनशील जानकारी का प्रसारण करने का आरोप लगाते हुए बुधवार, 9 नवंबर को उसे एक दिन के लिए आॅफ एयर रखे जाने का आदेश दिया था।

जबकि एनडीटीवी ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा था कि अन्य चैनलों तथा समाचारपत्रों ने भी वही रिपोर्ट प्रसारित की थी। इस प्रतिबंध को लेकर पत्रकारों और संपादकों में सरकार की चैतरफा आलोचना शुरू हो गयी थी। इस आदेश को देश में लागू की गई एमरजेंसी के समान बताया जा रहा था।

बन को स्थगित करने पर ज़ाहिर है प्रतिक्रियाओं का दौर चल पड़ा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने इसे आम लोगों की शक्ति की जीत बताते हुए एनडीटीवी को बधाई दी तो सोशल मीडिया यूज़र्स का एक बड़ा वर्ग ऐसा था जिसने असम के चैनल न्यूज़ टाइम्स असम और कश्मीर के एक अखबार पर लगे इसी तरह के प्रतिबन्ध पर सवाल खड़े किये।

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