परिवार को चलाने के लिए चाय बेचने को मजबूर है भारत की पूर्व फुटबाल महिला खिलाड़ी

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दस साल पहले देश की नुमाइंदगी करने वाली एक महिला फुटबालर आर्थिक तंगहाली के कारण पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में सड़क पर चाय बेचने को मजबूर है। 26 वर्षीय कल्पना राय अभी भी 30 लड़कों को दिन में दो बार प्रशिक्षण देती है। उसका सपना एक बार फिर देश के लिए खेलने का है।

फोटो: Amar Ujala

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, कल्पना को 2013 में भारतीय फुटबाल संघ द्वारा आयोजित महिला लीग के दौरान दाहिने पैर में चोट लगी थी। उसने कहा ,‘मुझे इससे उबरने में एक साल लगा। मुझे किसी से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। इसके अलावा तब से मैं चाय का ठेला लगा रही हूं।’ उसके पिता चाय का ठेला लगाते थे लेकिन अब वह बढती उम्र की बीमारियों से परेशान है।

उसने कहा, ‘सीनियर राष्ट्रीय टीम के लिये ट्रायल के लिये मुझे बुलाया गया था लेकिन आर्थिक दिक्कतों के कारण मैं नहीं गई। मेरे पास कोलकाता में रहने की कोई जगह नहीं है। इसके अलावा अगर मैं गई तो परिवार को कौन देखेगा। मेरे पिता की तबीयत ठीक नहीं रहती।’

कल्पना ने 2008 में अंडर 19 फुटबालर के तौर पर चार अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। अब वह 30 लड़कों को सुबह और शाम कोचिंग देती है। वह चार बजे दुकान बंद करके दो घंटे अभ्यास कराती है और फिर दुकान खोलती है।

उसने कहा, ‘लड़कों का क्लब मुझे 3000 रूपये महीना देता है जो मेरे लिये बहुत जरूरी है।’ कल्पना ने कहा कि वह सीनियर स्तर पर खेलने के लिये फिट है और कोचिंग के लिये अनुभवी भी। उसने कहा, ‘मैं दोनों तरीकों से योगदान दे सकती हूं, मुझे एक नौकरी की जरूरत है ताकि परिवार चला सकूं।’

कल्पना पांच बहनों में सबसे छोटी है। उनमें से चार की शादी हो चुकी है और एक उसके साथ रहती है। उसकी मां का चार साल पहले निधन हो गया, अब परिवार कल्पना ही चलाती है।

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