दिल्ली हाई कोर्ट से ‘जी मीडिया’ को बड़ा झटका, विज्ञापन में रजत शर्मा का नाम इस्तेमाल करने पर लगाई रोक

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‘जी मीडिया’ ग्रुप के एक चैनल ‘जी हिंदुस्तान’ ने पिछले कुछ दिनों से कई अंग्रेजी और हिंदी अखबारों में फुल पेज विज्ञापन देकर अपने प्रतिद्वंद्वी न्यूज चैनलों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। पिछले दिनों ‘जी हिंदुस्तान’ की तरफ से अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदुस्तान टाइम्स’, ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ और हिंदी दैनिक अखबार ‘हिंदुस्तान’ में पूरे पेज के एक विज्ञापन में रिपब्लिक टीवी के एडिटन इन चीफ अर्नब गोस्वामी, इंडिया टीवी के चैयरमैन और एडिटर इन चीफ रजत शर्मा, आजतक की अंजना ओम कश्यप और एनडीटीवी के रवीश कुमार के भविष्य को लेकर सवाल उठाया गया था।

‘जी हिंदुस्तान’ ने 9 जनवरी को ‘द हिंदुस्तान टाइम्स’ में पूरे पेज के एक विज्ञापन में कहा गया था कि, “अर्नब की डिबेट अब कौन सुनेगा? अंजना की जरूरत थी सिर्फ कल तक! इंडिया में अब रजत की अदालत बंद!” इसके अलावा ‘जी’ ने 10 जनवरी को ‘हिंदुस्तान’ में भी एक फूल पेज का विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन में अर्नब और रजत शर्मा के साथ-साथ एनडीटीवी के रवीश कुमार को भी निशाने पर लिया गया था। हिंदुस्तान में जारी विज्ञापन में लिखा गया था, “अर्नब की डिबेट अब कौन सुनेगा? रवीश कुमार का प्राइम अब नहीं रहा प्राइम! इंडिया में अब रजत की अदालत बंद!”

दिल्ली हाई कोर्ट से ‘जी मीडिया’ को बड़ा झटका

इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘जी मीडिया’ को प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ऐसा कोई विज्ञापन जारी करने से रोक दिया है जिसमें इंडिया टीवी के वरिष्ठ पत्रकार और संपादक रजत शर्मा का नाम शामिल हो। अदालत ने निर्देश दिया कि ऐसे विज्ञापन तीन दिन में हटाए जाएं। ‘जी हिन्दुस्तान’ चैनल के विज्ञापन में मीडिया समूह ने ‘भारत में अब रजत की अदालत बंद’ पंक्ति का इस्तेमाल किया था। रजत शर्मा इंडिया टीवी पर प्रसारित ‘आप की अदालत’ कार्यक्रम की एंकरिंग करते हैं।

पीटीआई/भाषा के मुताबिक, यह आदेश इंडिपेंडेंट न्यूज सर्विस प्राइवेट लिमिटेड (इंडिया टीवी) के प्रधान संपादक शर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनाया गया जिसमें मीडिया समूह को उसके समाचार चैनल ‘जी हिन्दुस्तान’ द्वारा पत्रकार के नाम का इस्तेमाल करते हुए ‘‘द्वेषपूर्ण तरीके से’’ जारी विज्ञापनों को फौरन हटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया। न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने एकपक्षीय आदेश में कहा कि विज्ञापन में शर्मा के नाम का जिक्र पहली नजर में गैरकानूनी है और मीडिया समूह को ऐसा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अदालत ने कहा कि प्रतिवादियों (जी मीडिया कॉरपोरेशन और इसके प्रबंध निदेशक) को प्रिंट मीडिया, टीवी चैनलों या अन्य पर याचिकाकर्ता (शर्मा) के नाम वाला कोई विज्ञापन जारी करने से रोका जाता है। वे याचिकाकर्ता के नाम के जिक्र वाले होर्डिंग तीन दिन के भीतर हटाएं। अदालत ने मीडिया समूह तथा इसके प्रबंध निर्देशक को सम्मन भी जारी किए हैं।

दरअसल, अखबारों में प्रकाशित जी मीडिया के विज्ञापन में लिखा गया है कि अब एंकर नहीं खबरें खुल बोलेंगी, क्योंकि आप समझदार हैं। आगे लिखा है कि जी हिंदुस्तान है देश का पहला न्यूज चैनल जहां हर खबर होगी बिना एंकर ताकि खबरों और आपके नजरिए पर किसी राय हावी न हो। खबर है कि जी हिंदुस्तान बगैर एंकर के ऑन एयर करके इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक नया प्रयोग करने जा रहा है।

अंजना ओम कश्यप ने ‘जी’ पर किया पलटवार

‘जी हिंदुस्तान’ के इस विज्ञापन पर रिपब्लिक टीवी, आजतक और NDTV की तरफ से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई हैं। हालांकि, आजतक की अंजना ओम कश्यप ने ट्विटर के जरिए ‘जी’ पर पलटवार जरूर किया है। ‘जी’ का विज्ञापन शेयर करते हुए अंजना ने लिखा है, “नाम ज़रा अदब से लीजिए!”

https://twitter.com/anjanaomkashyap/status/1084029037918457856

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