बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की एक अदालत में सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के खिलाफ एक मामला दायर किया गया। अहियापुर थाना क्षेत्र के भीखनपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी ने सोमवार को मुजफ्फरपुर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) सूर्यकांत तिवारी की अदालत में सोमवार को मामला दायर कराया।
इन पर एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएल) से बीते पखवाड़े में लापरवाही बरतने की वजह से 82 बच्चों की मौत का आरोप लगाया गया है। इस मामले की सुनवाई 24 जून को होगी। मालूम हो कि बिहार में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएल) से मुजफ्फरपुर में बच्चों की हो रही मौत का आंकड़ा सोमवार को 100 पार कर गया है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, याचिका में कहा गया कि हर्ष वर्धन व मंगल पांडेय, एईएस प्रकोप को नियंत्रित करने की अपने ड्यूटी को पूरा करने में विफल रहे हैं। एईएस से बच्चों की सालों से मौत के बावजूद इन दोनों ने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों में जागरूकता व संवेदनशीलता पैदा करने के लिए कुछ नहीं किया। अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 24 जून की तारीख तय कर दी।
हाशमी ने कहा कि उन्होंने भारतीय दंड सहिता (आईपीसी) की धारा 323, 308 व 504 के तहत आरोपी हर्ष वर्धन व मंगल पांडेय के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन्होंने कहा, “लापरवाही व बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से उचित इलाज नहीं मिलने से बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई है।”
बता दें कि केंद्रीय मंत्री हर्ष वर्धन, उनके साथ केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे व बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने मुजफ्फरपुर में सरकारी श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज व अस्पताल का रविवार को दौरा किया था। जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मंत्रियों ने स्थिति का जायजा लेने के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की।चमकी बुखार से पीड़ित मासूमों की सबसे ज्यादा मौतें मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में हुई हैं।