टूलकिट मामले में गिरफ्तार दिशा रवि के समर्थन में उतरीं ग्रेटा थनबर्ग, उठाया मानवाधिकार का मुद्दा

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किसान आंदोलन से संबंधित टूलकिट मामले में गिरफ्तार 22 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि के समर्थन में अब स्वीडन की जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ने ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में स्टैंड विथ दिशा रवि के हैशटैग का प्रयोग करते हुए थनबर्ग ने कहा कि बोलने की आजादी, लोकतंत्र का मूल हिस्सा होना चाहिए।

दिशा रवि

ग्रेटा थनबर्ग ने फ्राइडेज फॉर फ्यूचर (FFF) नाम के एक ट्विटर हैंडल के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा कि अभिव्यक्ति की आजादी, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और जनसभा करना मानवाधिकार है। ये किसी भी लोकतंत्र का मूल हिस्सा होना चाहिए। फ्राइडे फॉर फ्यूचर की स्थापना ग्रेटा थनबर्ग ने अगस्त 2018 में की थी, जब वह महज 15 साल की थीं। इसी के ट्विटर हैंडल से दिशा रवि के समर्थन में कई ट्वीट किए गए थे जिसके बाद ग्रेटा ने भी अपनी आवाज उठाई है।

फ्राइडेज फॉर फ्यूचर ने ट्वीट कर कहा, दिशा हमारे आंदोलन का अहम हिस्सा है न केवल वह भारत में पर्यावरण के मामलों में अपनी आवाज उठा रही है, बल्कि देश के सबसे ज्यादा प्रभावित और वंचित समूह को समानता और भागीदारी दिलाने के मामले में भी संघर्ष कर रही है।

ग्रेटा थनबर्ग को जलवायु संकट के खिलाफ लड़ाई में सबसे अग्रणी वक्ता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कई बार अपने भाषणों से लोगों को दिल जीता है।

बता दें, दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि को जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग द्वारा साझा किए गए किसानों के आंदोलन का समर्थन करने वाले ‘टूलकिट’ मामले में 13 फरवरी को बेंगलुरू से गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि दिशा रवि के साथ शांतनु मुलुक और निकिता जैकब ने किसान आंदोलन से जुड़ी टूल किट में एडिट किया था। इस टूल किट में प्लान था कि कैसे किसानों के प्रदर्शन को आगे ले जाना है।

दिल्ली पुलिस ने इसे राजद्रोह का मामला बताया है, जबकि आलोचकों का कहना है कि किसी भी मामले में सोशल मीडिया पर ऐसा कंपेन चलाया जाता है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि थनबर्ग ने पहले यह गूगल डॉक्यूमेंट ट्वीट कर दिया था, लेकिन बाद में इसे डिलीट कर दिया। दिल्ली में किसानों की 26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर रैली में हिंसा भड़क गई थी।

दिशा रवि की गिरफ़्तारी के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार की आलोचना की है। उनके साथ ही पर्यावरण के लिए काम करने वाले लोग और नागरिक संगठनों से जुड़े लोग भी दिशा के समर्थन में आ गए हैं।

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